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प्रारंभिक सत्यापन के दौरान जारी नहीं किया जा सकता समन : हाईकोर्ट

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सीआरपीसी की धारा 91 की शक्तियों का इस्तेमाल जांच या मुकदमे के दौरान ही हो सकता है
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जम्मू-कश्मीर सहकारी आवास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक की याचिका पर सुनाया फैसला
हाईकोर्ट ने एसीबी के समन को किया रद्द

अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 91 की शक्तियों का इस्तेमाल जांच या मुकदमे के दौरान ही किया जा सकता है। प्रारंभिक सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान इसके तहत किसी को समन नहीं भेजा जा सकता। एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की है।
इसी के साथ हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा जारी समन को रद्द कर दिया। एसीबी ने साल 2023 में लेडीज कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड सांबा (सोसाइटी) के खिलाफ प्रारंभिक सत्यापन कार्यवाही शुरू की थी। इसी दौरान एसीबी ने जम्मू-कश्मीर सहकारी आवास निगम लिमिटेड, जम्मू (जेकेएचडीसीओ) के प्रबंध निदेशक को मामले से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
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इसपर प्रबंध निदेशक ने सोसाइटी के सचिव से आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। इसके बाद सोसायटी ने एक याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट में प्रारंभिक सत्यापन को चुनौती दी। इसपर न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में एसीबी को सत्यापन की प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन अदालत की पूर्व अनुमति के बिना एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगा दी। इसके बावजूद एसीबी ने सीआरपीसी की धारा 91 के तहत समन जारी किए, जिनमें जेकेएचडीसीओ के प्रबंध निदेशक भारत भूषण से दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया।
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इसी के खिलाफ भारत भूषण ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और समन को रद्द करने की मांग की। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि मामला अभी भी प्रारंभिक सत्यापन के चरण में है। इसलिए एसीबी रिकॉर्ड तलब करने के लिए सीआरपीसी की धारा 91 लागू नहीं कर सकती। इसी के साथ हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए एसीबी द्वारा जारी समन को रद्द कर दिया।
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