जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों से सुरक्षा वापस लेने की अपील पर हाईकोर्ट की ओर से राज्य सरकार को आपत्तियां पेश करने के आदेश मिले हैं। वहीं, छह हफ्ते में अपना पक्ष रखने को कहा है।
शुक्रवार को जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायाधीश ताशी रबसटन की खंडपीठ ने यह निर्णय लिया है।
दिवाकर शर्मा ने जनहित याचिका में बताया कि रियासत 1990 से आतंकवाद से पीड़ित है। विशेषकर कश्मीर में हालात काफी खराब हैं। कई ऐसी ताकतें हैं जो देश का विघटन करने में जुटी हैं।
इसके बावजूद सरकार ने अलगाववादी नेताओं को सुरक्षा प्रदान की है, जोकि गलत है। ऐसी राष्ट्रविरोधी ताकतों को सुविधाएं मुहैया करवा कर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है। इसलिए ऐसे लोगों से सुरक्षा और सुविधाएं वापस ली जाएं।