बरसात में पाकिस्तान से घुसपैठ की आशंका के बीच बीएसएफ ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है। जम्मू, सांबा और कठुआ जिले के करीब 200 नदी-नालों का बहाव पाकिस्तान की ओर है, इसलिए बीएसएफ इन जिलों में खास सतर्कता बरत रही है।
खराब मौसम की आड़ में आतंकी नदी-नालों के जरिये घुसपैठ का प्रयास करते हैं। इस पर नजर रखने के लिए बीएसएफ ने नाव से गश्त शुरू कर दी है। बीएसएफ के जवान जम्मू में तवी, चिनाब, बसंतर, उज्ज जैसी प्रमुख नदियों में गश्त कर रहे हैं। तवी और चिनाब नदी जम्मू जिले से, बसंतर सांबा और उज्ज नदी कठुआ से पाकिस्तान की ओर बहती है।
पाकिस्तान की सीमा से लेकर करीब पांच किलोमीटर के दायरे में नावों में 24 घंटे में तीन से चार बार गश्त की जा रही है। इस गश्त में बीएसएफ के वाटर विंग के जवान शामिल हैं, जो नदियों में गश्त के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं। बता दें कि बरसात के मौसम में सीमा पर तारबंदी (फेंसिंग) को नुकसान भी पहुंचता है। उपकरण भी सही से काम नहीं करते। इसका फायदा उठाकर आतंकी घुसपैठ का प्रयास करते हैं। फेंसिंग को कहीं नुकसान तो नहीं पहुंचा है, बीएसएफ इसकी भी जांच कर रही है।
सुरंगरोधी दस्ते ने भी गश्त बढ़ाई
बरसात के मौसम में आतंकी सुरंग खोदकर घुसपैठ करने की कोशिश करते हैं। इस दौरान जमीन में काफी नमी रहती है, जिससे सुरंग बनाना आसान होता है। इसे देखते हुए बीएसएफ के एंटी टनल स्क्वाॅयड (सुरंगरोधी दस्ता) ने भी गश्त बढ़ा दी है। खासकर सांबा, रामगढ़, सुचेतगढ़, हीरानगर के क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई है।
सीमा पार से घुसपैठ रोकना हमेशा ही चुनौतीपूर्ण होता है। बरसात में ये थोड़ी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए वाटर विंग और एंटी टनल दस्तों की गश्त को बढ़ा दिया गया है।
-विक्रम कंवर, डीआईजी बीएसएफ
अक्सर बरसात में बढ़ जाती है घुसपैठ
सूत्रों के मुताबिक बरसात को देखते हुए सेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर चौकसी बढ़ा दी है। राजोरी, पुंछ, कुपवाड़ा, बांदीपोरा और बारामुला जिलों की एलओसी पर सेना ने विशेष गश्त शुरू की है। इन जिलाें की एलओसी पर भी अक्सर बरसात में घुसपैठ की आशंका बढ़ जाती है।