केसर के गढ़ में भगवा की परीक्षा होगी। वोटों की फसल में नेकां का हल और पीडीपी कलम की ताकत दिखाने को आतुर है। भाजपा ने चेहरा बदला है। नेकां का पुराने चेहरे पर विश्वास है। पीडीपी ने भी टाक को साबित करने का मौका दिया है।
केसर की खेती और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के लिए जाने जाने वाली किश्तवाड़ विधानसभा सीट पर चुनावी सरगर्मियां तेज हैं। यहां नेकां, पीडीपी और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों के बीच मतदाता बंटा हुआ है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में स्थानीय युवाओं को रोजगार और आसपास के क्षेत्रों में निशुल्क बिजली न मिलने सहित बिजली की अघोषित कटौती को मुद्दा बना रहे हैं। भाजपा सुरक्षा, विकास जैसे मुद्दों को लेकर मतदाताओं के बीच में है।
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1962 में बनी किश्तवाड़ विधानसभा सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सबसे ज्यादा छह बार जीत हासिल की है। कांग्रेस भी हैट्रिक बना चुकी है। भाजपा को एक बार जीत मिली है। पहले चरण में 18 सितंबर को इस सीट पर मतदान है। यहां नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस का संयुक्त उम्मीदवार दो बार के विधायक सज्जाद अहमद किचलू मैदान में हैं तो भाजपा ने बलिदानी अनिल परिहार की भतीजी शगुन परिहार पर दांव खेला है।
पीडीपी ने फिरदौस टॉक को मैदान में उतारा है। 2014 में किश्तवाड़ सीट भाजपा ने जीती थी। सुनील शर्मा ने दो बार के विधायक सज्जाद अहमद किचलू को 4.63 फीसदी वोट के अंतर से हराया था। सज्जाद किचलू तीन बार के विधायक रहे बशीर अहमद किचलू के पुत्र हैं। 2014 में भाजपा ने पहली बार इस सीट पर जीत का खाता खोला था।
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किश्तवाड़ का चौगान मैदान कई बड़ी राजनीतिक घटनाओं का गवाह रहा है, लेकिन आज खुद संरक्षण के लिए तरस रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मैदान के संरक्षण की जरूरत है। इसमें ओपन एयर जिम सहित अन्य सुविधाएं होनी चाहिए ताकि लोग सुबह-शाम यहां आएं। किश्तवाड़ के मुख्य बाजार में ट्रैफिक जाम बड़ी समस्या है। बाजार के बाहर से सर्कुलर रोड बनने से जाम से निजात मिलेगी।
चार हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट, लेकिन स्थानीय लोग रोजगार के लिए तरस रहे
किश्तवाड़ विधानसभा सीट में चार हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट चल रहे हैं। रतले, कीरू, कवाड़ और पक्का डूल। इनसे बनने वाली बिजली देश के अन्य राज्यों को बेची जा रही है लेकिन किश्तवाड़ में अघोषित बिजली कटौती से लोग परेशान हैं। पावर प्रोजेक्ट के आस-पास वाले इलाकों में निशुल्क बिजली नहीं मिलती है।
इन प्रोजेक्ट में स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है। इतना जरूर है कि स्थानीय इंजीनियरों को रोजगार मिला है लेकिन अन्य राज्यों से नियुक्त इंजीनियरों के मुकाबले लाभ नहीं मिल रहे। वेतन, अलाउंस सहित अन्य सुविधाओं में असमानता है। प्रोजेक्ट के लिए जमीन देने वालों को आज तक न नौकरी मिली न मुआवजे का पैसा।
कई प्रोजेक्ट मिले पर रोजगार नहीं
किश्तवाड़ निवासी वेद प्रकाश गुप्ता कहते हैं कि विकास और सुरक्षा किश्तवाड़ की जनता के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है। किश्तवाड़ में केसर की खेती होती थी, लेकिन अब पैदावार कम हो गई है। इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। हमारे यहां बिजली परियोजनाएं हैं, लेकिन कुछ लोगों को ही रोजगार मिला है।
क्षेत्र के मुद्दे
विकास और सुरक्षा
रोजगार की जरूरत
चौगान मैदान का संरक्षण
ट्रैफिक जाम बड़ी समस्या