संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। लोग अपने बच्चों को संस्कार अवश्य दें, ताकि उनका बुढ़ापे सही ढंग से कट सके। साथ ही बच्चे माता-पिता, गो और साधुओं की सेवा कर सकें। यह ज्ञान रविवार को कथा वाचक मृदुल मोहन शास्त्री ने संगत को त्रिलोकपुर में जारी श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन संगत को दिया।
इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर कथा का श्रवण किया। तीसरे दिन कथा वाचक ने ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद चरित्र और नृसिंह अवतार की कथा सुनाई। हिरण्य कश्यप आदेश दे रहा है कि भक्त प्रह्लाद को खत्म करो, भस्म करो।
लकड़ियों के चारों तरफ जल्लाद खड़े कर दिए गए। तब भक्त प्रह्लाद ने इतना ही कहा अच्छा भगवान, अच्छा मेरे राम तेरी मर्जी और भक्त प्रह्लाद बच गए।