उपमुख्यमंत्री के समक्ष एसोसिएशन आफ इंडस्ट्रीज गंग्याल ने उठाए औद्योगिक क्षेत्र के मुद्दे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज (पंजीकृत) गंग्याल, जम्मू के एक शिष्टमंडल ने मंगलवार को अध्यक्ष वीरेंद्र जैन के नेतृत्व में उपमुख्यमंत्री एवं उद्योग मंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी से मुलाकात की। इस दौरान औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। इसमें प्रमुख रूप से जम्मू कश्मीर में सूक्ष्म/लघु उद्योग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।
साथ ही इसके लिए एक नई औद्योगिक नीति और प्रोत्साहनों के पैकेज की मांग उठाई। जैन ने कहा कि स्थानीय सूक्ष्म/लघु क्षेत्र को राजकोषीय प्रोत्साहन की सख्त जरूरत है। जम्मू-कश्मीर सरकार को यह स्वीकार करना चाहिए कि औद्योगिक क्षेत्र का अस्तित्व और विकास काफी हद तक स्थानीय लोगों के योगदान पर निर्भर रहा है।
सूक्ष्म/लघु उद्यमी अपने प्रतिष्ठानों में स्थानीय कर्मचारियों को पर्याप्त रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं। इसलिए वर्तमान प्रणाली के विपरीत उनकी वास्तविक आवश्यकता के बराबर टर्नओवर प्रोत्साहन की प्रतिपूर्ति के लिए बजटीय सहायता बढ़ाई जाए। सरकार से पांच साल के लिए बिजली शुल्क स्थिर रखने पर जोर दिया।
खाद्य तेल औद्योगिक इकाइयों को राज्य नकारात्मक सूची से हटाया जाए। स्थानीय सूक्ष्म/लघु इकाइयों के सबसे बड़े प्रतिनिधि संगठन सिकॉप के निदेशक मंडल में प्रतिनिधित्व की भी मांग की गई। शिष्टमंडल में पदाधिकारियों में संजय लंगर, एसबी अबरोल, संदीप ओहरी, जय महाजन, जितेंद्र सिंह शामिल रहे।
यह भी उठाई मांगें
स्थानीय सूक्ष्म/लघु औद्योगिक क्षेत्र को विशेष रूप से राजकोषीय प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए कम से कम 2000 करोड़ रुपये निर्धारित किए जाएं। फ्री होल्ड अधिकार दिए जाएं। उनके सुचारू संचालन के लिए हानिकारक खंडों को हटाने/संशोधित करने और विभिन्न ऑनलाइन रिटर्न भरने/जमा करने में देरी को माफ किया जाए। सिकॉप/सिडको के विभिन्न औद्योगिक एस्टेट/क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति से अवगत करवाया, जबकि दोनों निर्धारित विकास व रखरखाव शुल्क ले रहे हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित क्रिकेट बैट उद्योगों के लिए कच्चे माल की खरीद की प्रणाली को सुव्यवस्थित करने और उनके इन-हाउस बैंड सॉ के लिए लाइसेंस की अवधि बढ़ाने पर जोर दिया।