अभिजीत मुहूर्त सबसे शुभ, सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर साढ़े 12 बजे तक मुहूर्त
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। माघ माह की गुप्त नवरात्र 30 जनवरी से शुरू होंगे और छह फरवरी तक चलेंगे। सनातन धर्म में यह नौ दिन देवी दुर्गा और काली की उपासना के लिए बहुत खास माने जाते हैं। इन नवरात्र में गुप्त रूप से माता की साधना की जाती है।
ज्योतिष मोहन लाल केरनी ने बताया कि साल में चार बार नवरात्र आते हैं। इनमें से दो प्रत्यक्ष नवरात्र और दो गुप्त नवरात्र होते हैं। गुप्त नवरात्रि आषाढ़ और माघ माह में आते हैं। पंचांग के अनुसार माघ गुप्त नवरात्र की शुरुआत 30 जनवरी से हो रही है।
इसमें माता की पूजा की विधियां लगभग प्रत्यक्ष नवरात्र जैसी ही हैं, बस इसमें कलश स्थापना और साख नहीं लगाई जाती। साथ ही माता की साधना भी गुप्त रूप से की जाती है। इसके अलावा गुप्त नवरात्र में विद्या सिद्धि करने के लिए खास साधना की जाती है। इन्हीं नवरात्र के तीसरी तिथि को वसंत पंचमी आती है, जिस दिन मां गौरी की पूजा की जाती है।
इस नवरात्र के दौरान पूजा करने के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे शुभ है। यह मुहूर्त 30 जनवरी को सुबह 10:30 से शुरू होकर दोपहर 12:30 बजे तक है।
तांत्रिक साधना और शक्ति प्राप्त करने
के लिए गुप्त नवरात्र का खास महत्व
आचार्य राजभूषण शास्त्री ने बताया कि तांत्रिक साधना और शक्ति प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्र का खास महत्व है। प्रत्यक्ष नवरात्र में नौ माताओं की साधना की जाती है, जबकि गुप्त नवरात्र में दस माताओं की साधना कर मोक्ष की कामना की जाती है। प्रत्यक्ष नवरात्र की प्रमुख देवी मां पार्वती हैं, जबकि गुप्त नवरात्र की प्रमुख देवी मां काली हैं।