दो दिवसीय गोजरी सम्मेलन का राइटर्स क्लब में समापन, 150 लेखकों व कलाकारों ने लिया हिस्सा
गुज्जर-बकरवाल समुदाय की समृद्ध परंपराओं के संरक्षण को लेकर की चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी (जेकेएएसीएल) की ओर से आयोजित दो दिवसीय गोजरी सम्मेलन का वीरवार को राइटर्स क्लब में समापन हो गया। इसमें करीब 150 गोजरी लेखकों और कलाकारों ने भाग लिया। साथ ही गुज्जर-बकरवाल समुदाय की समृद्ध परंपराओं के संरक्षण पर चर्चा की गई।
सम्मेलन में प्रमुख मुद्दों गोजरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल करने और जम्मू व कश्मीर विश्वविद्यालय में गोजरी भाषा को एक विषय के रूप में शामिल करने की मांग की गई। लेखकों ने कहा कि यह गोजरी भाषा और संस्कृति के अस्तित्व एवं विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
जेकेएएसीएल की सचिव हरविंदर कौर ने बताया कि अकादमी का गोजरी विंग सबसे सक्रिय विंग्स में से एक है। लेखकों को अकादमी की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए जागरूक किया। डॉ. जावेद राही ने गोजरी की लोक परंपराओं को संरक्षित करने के अकादमी के प्रयासों पर जोर दिया। साथ ही लेखकों से गुज्जर-बकरवाल संस्कृति के दस्तावेजीकरण में भूमिका निभाने की अपील की।
सम्मेल में डॉ. इश्तियाक मिस्बाह, डॉ. निगहत चौधरी, मसूद आवान, एमके वकार, शौकत नसीम, महमूद चौहान, और रफीक सोज ने शोध पेपर पढ़े। महिला गुजरी लेखकों के लिए एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें शाजिया चौधरी, नसीम अख्तर, कलसूम अख्तर, जुलीखा, शादिया परवीन और अनीसा करीम ने संस्कृति में महिलाओं की भूमिका और गोजरी साहित्य में उनके योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।
जान मोहम्मद हकीम और हसन परवाज की अध्यक्षता में मुशायरा हुआ। इसमें मसरूफ गालिब गरी, तारिक फहीम, रफीक सोज, बशीर खाकी, खाकान सज्जाद, बशारत नाजाक, बशारत एजाज, नसीम गुलाबघरी, बिलाल जमजम, तैयब रजा जिलानी, खालिद सोरवर्दी, जाहिदा खानम, सद्दाम सराफ और रफी शबनम ने हिस्सा लिया।