कानून के जानकार बोले: पुलिस में बैठे भ्रष्ट लोगों की वजह से बढ़े तस्करों के हौसले
पहले ढील दी, अब बेलगाम होने पर कार्रवाई करने में हो रहे हमले
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पुलिस को तस्करी रोकना महंगा पड़ रहा है। नशा तस्करी, पशु तस्करी और खनन रोकने की कार्रवाई करने पहुंचने वाली पुलिस को पीटा जा रहा है। तस्करों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि गोली चलाना आम बात हो गई है। दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि एक थानेदार और सब-इंस्पेक्टर को पीटकर अधमरा कर दिया गया। कानून के जानकारों की मानें तो इसकी जिम्मेदार पुलिस खुद है।
पुलिस के भीतर ही ऐसे लोग हैं, जो तस्करों से महीने भर रिश्वत लेते हैं। चौकी अधिकारी से लेकर बड़े अधिकारी तक मोटी कमाई कर रहे हैं, जो इस समस्या की बड़ी वजह बन रही है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि यह सब तस्करों पर कसते शिकंजे की वजह से हो रहा है। एक कारण नशा भी है, क्योंकि ऐसी वारदातों में शामिल 90 फीसदी लोग नशा करने वाले हैं।
बीते दो महीनों में जम्मू और सांबा जिलों में पुलिस पर कई हमले हुए हैं। इनमें सबसे बड़ा हमला बाड़ी ब्राह्मणा पुलिस थाने के एसएचओ पुष्पिंदर सिंह पर हुआ था, जिनका अभी भी इलाज चल रहा है। जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2024 से लेकर अप्रैल 2025 तक जम्मू और सांबा जिलों में पुलिस टीमों पर 35 से 40 हमले हुए हैं। ये हमले गैंगस्टरों, नशा तस्करों, पशु तस्करों और खनन माफियाओं ने किए हैं।
डीआईजी जम्मू शिव कुमार शर्मा का कहना है कि पुलिस की सख्त कार्रवाई से तस्कर बौखला रहे हैं और पुलिस आगे भी कड़ी कार्रवाई करेगी।
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पहले ढील दी, अब बेलगाम
पुलिस महकमे के भीतर ही भ्रष्ट लोग हैं। चौकी अधिकारी से लेकर बड़े अधिकारी तक नशा तस्करों, पशु तस्करों और खनन माफियाओं से पैसे लेते हैं। अब हालात यह हैं कि ये तस्कर बेलगाम हो चुके हैं। जब हर महीने पुलिस को रिश्वत देने वाले को रोका जाएगा, तो वे हमला करेंगे ही। पुलिस की ही कमजोरी है कि जम्मू से श्रीनगर तक पशुओं से भरा ट्रक आसानी से पहुंच जाता है। रात होते ही जम्मू-तवी में खुलेआम खनन शुरू हो जाता है। पुलिस ने पहले खुद अपराधियों को पनपने दिया, जो अब उन्हीं को निशाना बना रहे हैं।
-शेख शकील, वरिष्ठ अधिवक्ता, हाईकोर्ट जम्मू
लालच से मिली छूट, इसलिए हौसले बुलंद
पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा। एक आम नागरिक अगर गलत जगह गाड़ी पार्क कर दे, तो उसका चालान काट दिया जाता है, लेकिन मिनीबस या बस चालक कहीं भी गाड़ी खड़ी कर देते हैं, तो कुछ नहीं होता, क्योंकि वे हर महीने पैसे देते हैं। खनन करने वाले, नशा तस्कर और पशु तस्करों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई कमजोर है, इसलिए ये पकड़े जाने पर जल्द ही छूट जाते हैं। पुलिस के कुछ लोग लालच में अपराधियों को छूट दे रहे हैं, जिसकी वजह से अब उन पर ही हमले हो रहे हैं।
-सबीता नायर, प्रोफेसर, आपराधिक कानून और अपराध विज्ञान, जम्मू यूनिवर्सिटी
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पुलिस पर बड़े हमले
केस 1: 10 अप्रैल 2025 को बाड़ी ब्राह्मणा पुलिस थाने के एसएचओ पर नशा तस्करों ने हमला किया। इसमें एसएचओ समेत चार पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।
केस 2: अप्रैल 2025 में मीरां साहिब क्षेत्र में पुलिस टीम पर नशा और पशु तस्करों ने हमला किया। इससे पहले फरवरी 2025 में ही मिरां साहिब पुलिस स्टेशन में बदमाशों ने पुलिस टीम पर गोली चला दी थी, लेकिन पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए।
केस 3 : अप्रैल 2024 में कठुआ में सब-इंस्पेक्टर दीपक शर्मा पर कुख्यात गैंगस्टरों और नशा तस्करों ने गोली चला दी, जिसमें उनकी मौत हो गई। यह पहला मामला था जब किसी पुलिस अधिकारी ने अपराधियों के साथ मुठभेड़ में बलिदान दिया।