- 21 साल तक डिवीजनल ऑफिस में सेवा देने के बाद भी नहीं मिला प्रमोशन
- कैट ने कहा, समानता के नाम पर गलत मिसाल नहीं दी जा सकती
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि सिर्फ ट्रांसफर से किसी कर्मचारी का कैडर नहीं बदलता, जब तक कि इसके लिए सक्षम प्राधिकरण की ओर से स्पष्ट आदेश न जारी किया गया हो। कैट ने न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा ने यह फैसला सहकारिता विभाग की एक महिला कर्मचारी के आवेदन पर सुनाया है।
महिला कर्मचारी को 27 अप्रैल 1995 को उधमपुर जिला कैडर में जूनियर असिस्टेंट के पद पर अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। इसके बाद 10 दिसंबर 1997 को उन्होंने खुद के अनुरोध पर जम्मू डिवीजनल ऑफिस में ट्रांसफर लिया और लगातार वहीं सेवाएं देती रहीं। उनका कहना था कि इतने लंबे समय तक एक ही जगह काम करने के बाद उन्हें डिवीजनल कैडर का हिस्सा माना जाना चाहिए और सीनियरिटी और प्रमोशन में उसी अनुसार लाभ मिलना चाहिए।
इसपर विभाग की ओर से कैट में कहा गया कि ट्रांसफर के बावजूद कर्मचारी का कैडर कभी बदला ही नहीं गया। न तो डिवीजनल कैडर में शामिल करने का कोई आदेश जारी हुआ और न ही कर्मचारी ने इसके लिए कोई औपचारिक आवेदन किया।
कैट ने इस पर फैसला सुनाते हुए कहा कि सेवा नियमों के अनुसार कैडर परिवर्तन एक औपचारिक प्रक्रिया है, जो केवल सक्षम अधिकारी की स्वीकृति और आदेश से ही हो सकती है। किसी कर्मचारी को लंबे समय तक किसी कार्यालय में काम करने से यह नहीं माना जा सकता कि उसका कैडर बदल गया है।
फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी और कर्मचारी को यदि नियमों के विरुद्ध लाभ मिल भी गया हो, तो वह समानता के नाम पर दूसरे को वह लाभ देने का आधार नहीं बन सकता। इसी के साथ कैट ने महिला के आवेदन को खारिज कर दिया।