याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष तथ्य स्पष्ट करने में रहे विफल
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना एसआरओ 120, 2018 को दी गई थी चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने विवाहित पुत्र और पुत्रियों को अनुकंपा नियुक्ति से बाहर करने को भेदभावपूर्ण बताया है। कैट के न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा व प्रशासनिक सदस्य राज मोहन जौहरी वाली पीठ ने सोमवार पर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है।
पीठ ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति मृतक कर्मचारी के परिवार की वित्तीय कठिनाई को कम करने के लिए दी जाती है। प्रतिवादी पक्ष यह बताने में विफल रहे हैं कि आश्रित के विवाहित होने से मृतक कर्मचारी के परिवार की आर्थिक स्थिति कैसे बदल सकती है। इसके मद्देनजर केवल एसआरओ 120, 2018 के आधार पर आवेदक के दावे को खारिज करना अस्वीकार्य है।
कैट ने ये आदेश सौरव मट्टू द्वारा दायर याचिका में पारित किया गया है। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) में सरकार द्वारा जारी अधिसूचना एसआरओ 120, 2018 को चुनौती दी गई थी। इस आदेश के तहत एक मृतक कर्मचारी के विवाहित पुत्र या विवाहित पुत्री को जम्मू और कश्मीर अनुकंपा नियुक्ति नियम 1994 के तहत अनुकंपा नियुक्ति का दावा करने से रोक दिया गया था।
आवेदक द्वारा दावा किया गया था कि इसे पूरी तरह से अवैध घोषित किया जाए। साथ ही अनुकंपा नियुक्ति की जाए। कैट ने याचिका को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि आवेदक को अनुकंपा नियुक्ति के लिए, एसआरओ 43, 1994 के प्रावधानों के अनुसार, एसआरओ 120, 2018 का संदर्भ लिए बिना नियुक्त दी जाए। जेएनएफ