नगर निगम आयुक्त को दौरा कर एटीआर दायर करने का निर्देश
अस्वस्थ और स्वस्थ पशुओं को एकसाथ रखने का हाईकोर्ट में हुआ खुलासा
जम्मू। नगरोटा में बनी गोशाला व मवेशी तालाब के कामकाज पर हाईकोर्ट ने असंतोष जताया है। साथ ही जम्मू नगर निगम आयुक्त और गोशाला इंचार्ज डाॅ. प्रियांक मल्होत्रा को दोबारा गोशाला का दौरा कर ताजा स्थिति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
सोमवार को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्तान एवं न्यायाधीश एमए चौधरी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की। ये निर्देश गैर सरकारी संगठन सेव (सेव एनिमल वैल्यू एनवायरनमेंट) की ओर से अध्यक्ष देविंदर कौर मदान उर्फ रम्पी मदान के माध्यम से दायर बहुचर्चित जनहित याचिका द्वारा पारित किया गया।
इसमें मवेशियों के उचित रखरखाव और गांव सेरी खुर्द (नगरोटा) में स्थित मवेशी तालाब व गोशाला के उचित रखरखाव के लिए जेएमसी को उचित निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शेख शकील ने दलील दी कि मवेशी तालाब व गोशाला में बेजुबान जानवर खराब छाया में हैं। यहां अस्वास्थ्यकर स्थितियां हैं। नगर निगम ने गोशाला को गोरक्षा समिति को आउटसोर्स कर दिया है। उक्त एनजीओ बेजुबान जानवरों की देखभाल करने में असमर्थ है।
दलीलों पर विचार करने के बाद खंडपीठ ने गोशाला की खराब स्थिति से संबंधित दो रिपोर्टों पर खुली अदालत में चिंता और असंतोष व्यक्त किया। अधिवक्ता हर्षवर्धन गुप्ता से एक विशिष्ट प्रश्न पूछा कि नगर निगम ने खुली अदालत में संदर्भित दो रिपोर्टों पर क्या कार्रवाई की है। अधिवक्ता ने नगर निगम की तरफ से कहा कि रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कुछ समय दिया जाए। इस पर खंडपीठ ने अगली सुनवाई की तारीख तक या उससे पहले कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) दाखिल करने का निर्देश दिया।
रिपोर्ट में यह कमियां आई सामने
खुली अदालत में कोर्ट कमिश्नर जिया-उल-कमर की रिपोर्ट पढ़ी, जिसमें कई कमियों की ओर इशारा किया गया। इसमें गायों, दूध देने वाली गायों, बछड़ों और कुछ बैलों को अलग न रखना शामिल था। ये सभी एक ही शेड में बंद मिले थे। बीमार और घायलों को भी स्वस्थ मवेशियों के साथ एक ही शेड में रखा गया था। एक अलग शेड में बिना टैग वाले छह घोड़े अस्वस्थ/कमजोर हालत में मिले। डाॅ. प्रियांक मल्होत्रा प्रभारी कैटल पाउंड नगरोटा द्वारा बताई गई कमियों का भी उल्लेख किया। इसमें उन्होंने जनशक्ति की कमी, एक्सपायर हो चुकी दवाओं का भंडारण, पशुओं को पर्याप्त आहार उपलब्ध न कराना, कैटल पाउंड से गोबर न हटाना, कैटल पाउंड में तैनात श्रमिकों/सेवकों को पहचान पत्र जारी न करना आदि का खुलासा किया।