अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू निवासी एक शख्स को विधानसभा चुनाव लड़ने की चाह के चलते सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।
मामला केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की जम्मू पीठ के एक फैसले के बाद सामने आया है। शख्स ने 2009 में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर खुद की नौकरी को बहाल करने की मांग की थी। जिसे साल 2021 में कैट को हस्तांतरित कर दिया गया।
आवेदक रशपाल सिंह ने याचिका में बताया कि वह जल शक्ति विभाग की अखनूर डिवीजन में पंप ड्राइवर के रूप में सेवारत थे। साल 2008 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने सात नवंबर, 2008 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया।
27 नवंबर, 2008 को आवेदन पर कोई फैसला होने से पहले उन्होंने एक दूसरा आवेदन कर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की अर्जी को वापस लेने और नौकरी को जारी रखने की मांग की। रशपाल सिंह का कहना है कि विभाग ने उसके दूसरे आवेदन पर विचार किए बिना ही तीन दिसंबर, 2008 को सेवानिवृत्ति का आदेश जारी कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से कहा गया कि उन्हें रशपाल की ओर से सिर्फ पहला आवेदन ही मिला था। उसके बाद उन्हें कोई आवेदन नहीं मिला।
मामले का फैसला सुनाते हुए राजिंदर सिंह डोगरा और राम मोहन जौहरी की पीठ ने कहा कि नियमानुसार एक कर्मचारी जिसने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है, वह सेवानिवृत्ति मिलने से पहले आवेदन वापस लेने का हकदार है।
हालांकि इस मामले में आवेदक यह साबित नहीं कर सका कि उसने सेवानिवृत्ति के आवेदन को वापस लेने के लिए कोई अर्जी की थी। लिहाजा वह नौकरी वापस पाने का हकदार नहीं है।