जम्मू में एक व्यापारी को डिजिटल अरेस्ट कर अभी तक सबसे बड़ी ऑनलाइन ठगी हुई है। इसमें साइबर अपराधियों ने कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर पीड़ित व्यापारी को कई बैंक खातों में कई बार लेन-देन के जरिए 4,44,20,000 (4.4 करोड़) रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। इस ऑनलाइन धोखाधड़ी का पर्दाफाश कर साइबर पुलिस जम्मू ने गुजरात से तीन लोगों को गिरफ्तार कर उन्हें जम्मू लाया है जिनसे आगे की पूछताछ की जा रही है।
बारी-बारी कई बैंक खातों से ठगे करोड़ो रुपयेएसएसपी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठगों ने धोखे से पीड़ित को कई बैंक खातों से 4,44,20,000 रुपये ट्रांसफर करने को मजबूर किया। एफआईआर बाद एक विस्तृत जांच शुरू हुई।
साइबर पुलिस स्टेशन जम्मू ने एक विशेष टीम बनाई पहले धन के लेन-देन फिर बैंक लेनदेन, मोबाइल संचार की जांच की। धोखाधड़ी से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट का भी विश्लेषण किया। जांच से पता चला कि धोखाधड़ी में शामिल नेटवर्क मुख्य रूप से गुजरात से चल रहा है।
खुफिया जानकारी के आधार पर, एक विशेष जांच दल को सूरत भेजा। यहां एक सुव्यवस्थित अभियान में तीन आरोपी चौहान मनीष अरुणभाई, अंश विठानी और किशोरभाई करमशीभाई दियोरिया को गिरफ्तार किया। प्राथमिक चार्जशीट न्यायालय में पेश की।
आरोपियों को जम्मू लाया कुछ और गिरफ्तारियां होगी
एसएसपी जम्मू ने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को पूछताछ के लिए जम्मू लाया गया। उनके साथ सह-षड्यंत्रकारियों की पहचान करने, अतिरिक्त सबूतों को उजागर करने और अपराध से जुड़े अन्य वित्तीय संबंधों का पता लगाने के लिए उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।
आरोपी की गिरफ्तारी को बड़ी सफलता बताते हुए एसएसपी ने कहा कि साइबर पुलिस जम्मू ने अब तक आरोपियों से जुड़े विभिन्न बैंक खातों में 55,88,256.74 रुपये फ्रीज कर दिए हैं। धोखाधड़ी की गई राशि को शिकायतकर्ता को वापस करने के लिए सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें से छह लाख रुपये पहले ही पीड़ित के खाते में वापस जमा कर दिए गए हैं। सोमवार को गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ मामले में पहला आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया।
रहें सतर्क, झांसे में न आएं, ऐसी किसी सजा का प्रावधान नहींइंचार्ज साइबर पुलिस स्टेशन जम्मू एसपी कामेश्वर सिंह ने बताया कि भारतीय कानून व्यवस्था में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई सजा नहीं है। ऐसे में अगर कोई आपको कानून प्रवर्तन अधिकारी या फिर कोई भी अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट करने की बात कहे तो उसके झांसे में नहीं आए। हमारी जागरूकता ही हमें इस तरह के साइबर अपराध से बचा सकती है। उन्होंने पहले भी डिजिटल अरेस्ट के मामले आए है।
क्या है डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट एक साइबर स्कैम है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम में फोन करने वाले कभी पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स, आरबीआई और दिल्ली या मुंबई पुलिस अधिकारी बनकर आत्मविश्वास से बात करते हैं। वॉट्सएप या स्काइप कॉल पर जब कनेक्ट करते हैं तो आपको फर्जी अधिकारी एकदम असली से लगते हैं। वे लोग पीड़ित इमोशनली और मेंटली टॉर्चर करते हैं।
यकीन दिलाते हैं कि उनके सा उनके परिजन के साथ कुछ बुरा हो चका है या होने वाला है। सामने बैठा व्यक्ति पुलिस की वर्दी में होता है, ऐसे में ज्यादातर लोग डर जाते हैं और उनके जाल में फंसते चले जाते हैं। वे वीडियो काल या ऑडियो कॉल पर नकली पुलिस स्टेशन का सेटअप दिखाते हैं, झूठे सबूत पेश करते हैं, और यह विश्वास दिलाते हैं कि पीड़ित किसी अवैध गतिविधि में शामिल है।