जम्मू। जम्मू, सांबा और कठुआ के खुशबूदार बासमती चावल को वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने की कवायद शुरू हो गई है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सैटेलाइट तकनीक से जुलाई में सर्वे कराएगा। इससे उत्पादन, सप्लाई और कीमत तय होगी जिसका लाभ किसानों का मिलेगा।
जम्मू, सांबा और कठुआ का बासमती लंबे समय से अपनी खुशबू और महीन दाने के लिए जाना जाता है। विभिन्न अध्ययनों में हर साल करीब एक लाख मीट्रिक टन तक बासमती उत्पादन का अनुमान बताया गया है। इसका बड़ा हिस्सा बाहरी बाजारों के साथ खाड़ी देशों तक भी पहुंचता है। अब तक खेती और उत्पादन के सटीक आंकड़े नहीं होने से निर्यातकों, एपीडा और सरकारी एजेंसियों को कई तरह की परेशानियां आती हैं। कई बार यह साफ नहीं हो पाता कि सीजन में कितना उत्पादन होगा और निर्यात के लिए कितना माल उपलब्ध रहेगा। नए डिजिटल सर्वे से यह जानकारी मिल सकेगी कि किस इलाके में कितनी खेती और कितना उत्पादन रहने की संभावना है।
मिलेंगे सटीक आंकड़े
एपीडा की क्षेत्रीय प्रभारी शहरीना मकबूल के अनुसार जुलाई में सर्वे कराने की योजना है। बासमती उत्पादन के सटीक आंकड़े मिलेंगे। निर्यात की योजना बनाने और विदेशी बाजार की मांग के हिसाब से सप्लाई की तैयारी करने में मदद होगी। अब विदेशी खरीदार यह जानना चाहते हैं कि चावल किस इलाके में उगा है। ऐसे में डिजिटल रिकॉर्ड से बासमती पर विदेशी खरीदारों का भरोसा और मजबूत हो सकता है। सर्वे से सरकार को भी बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। सही आंकड़ों से सप्लाई और कीमत पर नजर रखना भी आसान हो सकता है।
खाड़ी देशों में लगातार बढ़ रही मांग
खाड़ी देशों में भारतीय बासमती की मांग बढ़ रही है। एपीडा के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024-25 में बासमती निर्यात 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा रहा। सऊदी अरब, ईरान, इराक और यूएई बड़े बाजार हैं। ऐसे में जम्मू के बासमती का सही रिकॉर्ड तैयार होने से विदेशी बाजार में और मजबूती मिल सकती है। जानकारों का मानना है कि पंजाब और हरियाणा की तरह जम्मू के बासमती को पहचान नहीं मिल पाई। ऐसे में एआई आधारित सर्वे अहम भूमिका निभा सकता है।