सरकारी विभाग पैसों की किस प्रकार बर्बादी कर रहे हैं, इसका उदाहरण कृत्रिम झील परियोजना को देखने पर मिलता है। 14 साल में अभी तक काम पूरा नहीं होना संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। हैरानी तो इस बात की है कि अभी भी काम काफी बचा है और दावे किए जा रहे हैं कि अगले महीने में परियोजना जनसमर्पित कर दी जाएगी।
योजना के मुताबिक झील की लंबाई डेढ़ किलोमीटर और चौड़ाई 600 मीटर तय है, जो शहर के चौथे पुल के पास बेलीचराना में बननी है। झील को बनाने का अहम उद्देश्य पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करना है। विकास की बात करें तो सिर्फ बजट में हुआ है। जिस झील को 58 करोड़ में तैयार किया जाना था, अब उसकी लागत 180 करोड़ पहुंच गई है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पैसे बर्बाद करने के लिए परियोजना को धरातल पर उतारा गया, क्योंकि जिम्मेदार दावों में ही काम करवा रहे हैं। वहीं, पिछले साल फरवरी में टेंडर श्री बाला जी इंजीनियरिंग लिमिटेड को दिया गया है और कंपनी भी जल्द काम पूरा होने की बात कर रही है।
स्थानीय राजकुमार ने बताया कि प्रोजेक्ट अब भी एक सपना है। अगर प्रोजेक्ट पूरा होता है तो पर्यटन को पंख लगेंगे। इसी तरह ऑल जम्मू एंड कश्मीर होटल एंड लॉज एसोसिएशन के प्रधान पवन गुप्ता ने बताया कि प्रोजेक्ट कारोबार के लिए अहम है, लेकिन हालात यह है कि कई होटल बंद हो गए हैं, क्योंकि पर्यटन है ही नहीं। कई लोग होटल के कारोबार को छोड़कर नए कारोबार के साथ जुड़ रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि पर्यटन को बढ़ाने देने के लिए समय पर परियोजनाएं पूरी की जाएं।
अक्टूबर या नवंबर में झील बनकर तैयार हो जाएगी और लोगों को समर्पित कर दी जाएगी। झील लगभग 180 करोड़ की लागत से बनेगी। -राहुल यादव, आयुक्त, नगर निगम
कृत्रिम झील जम्मू के लोगों को लाभ देगी। संभाग में पर्यटन बढ़ेगा और रोजगार के अवसर खुलेंगे। -सुनैना मेहता, संयुक्त निदेशक, पर्यटन विभागविज्ञापन
पहले की कंपनी दिवालिया हो गई। नई कंपनी को ठेका दिया है। निक्की तवी में काम खत्म नहीं हुआ। बड़ी तवी में 80-85 प्रतिशत काम हो चुका है। मौसम ठीक रहा तो जुलाई तक सरकार को परियोजना सौंप देंगे। -एफआर भगत, एक्सईएन, बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई