72 वर्षीय बागवान प्रेमनाथ
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प्रेमनाथ ने बताया कि ठंडी जलवायु वाले मीर गांव में वे इक्का दुक्का पौधे लगाकर उनकी देखभाल करते थे। एक साल पूर्व उन्हें बागवानी विभाग की ओर से हाईडेंसिटी योजना के बारे में बताया गया। उन्होंने शुरुआती चरण में 10 मरला भूमि पर 75 पौधे लगवाए, जिनमें से 70 बच पाए। एम-9 टी-337 रूट स्टॉक पर हेपके और मेमा गाला वैरायटी सेब के पौधरोपण के एक साल बाद पौधे फलों से लदे देख वे खासे उत्साहित हैं। प्रेमनाथ बताते हैं कि अब रोजाना दूर-दूर से किसान और अन्य लोग उनका बगीचा देखने पहुंच रहे हैं। अच्छी किस्म के सेब के हाईडेंसिटी पौधरोपण से छोटे किसान भी अपनी तकदीर बदल सकते हैं।
एम9 रूट स्टॉक पर नई वैरायटी का है चमत्कार
सेब के पौधे से अच्छी फसल लेने के लिए छह से सात वर्ष का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन एम-9 रूट स्टॉक पर लगे अच्छी प्रजाति के सेब दूसरे या तीसरे वर्ष में ही फसल देने लगते हैं। बागवानी विभाग की योजना में जो पौधे सब्सिडी पर उपलब्ध करवाए जाते हैं, वे दूसरे देशों से आयात करवाए जाते हैं। यह पौधे दो से तीन वर्ष के होते हैं, जिसे लगाने के दूसरे ही वर्ष फसल आने लगती है।
उधमपुर समेत ठंडी जलवायु वाले क्षेत्र में हाईडेंसिटी सेब की बागवानी क्रांति ला सकती है। कश्मीर संभाग में योजना जोर शोर से चल रही है। जम्मू संभाग में बैंक से एमओयू की प्रक्रिया पूरी होते ही उधमपुर समेत जम्मू संभाग के बागवानों को भी इस योजना का व्यापक लाभ मिलेगा। इस साल कई किसानों के आवेदन आए हैं। सभी को लाभ देने का प्रयास किया जाएगा। - राजिंदर कुमार लोचन, मुख्य बागवानी अधिकारी उधमपुर
ये है हाईडेंसिटी योजना
एक लाभार्थी न्यूतनम एक कनाल और अधिकतम 20 कनाल (एक हेक्टेयर) पर योजना का लाभ ले सकता है। 20 कनाल में 3333 पौधे लगते हैं जिसमें पौधरोपण, ट्रेली सिस्टम, एंटी हेलनेट और ड्रिप इरिगेशन पर कुल 22.15 लाख का खर्च आता है। 50 फीसदी खर्च सरकार वहन करती है और दस फीसदी राशि किसान को देनी पड़ती है। शेष 40 फीसदी पैसा किसान छह फीसदी ब्याज पर ऋण ले सकते हैं। खास बात है कि ब्याज और ऋण चुकाने की प्रक्रिया तीन व पांच साल बाद शुरू होती है, जब पौधे व्यावसायिक स्तर पर बंपर फसल देने लगते हैं। इंडो डच कंपनी और नैफेड में करार है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर में 11 एजेंसियों को काम सौंपा गया है।