रियासत के विभिन्न हिस्सों में 3-4 नवंबर को हुई बेमौसम बर्फबारी को विशेष प्राकृतिक आपदा घोषित किया गया है। इसमें संबंधित जिला उपायुक्तों को प्रभावित लोगों को तत्काल राहत के लिए दस करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
बर्फ हटाने के काम के लिए 28 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मशीनों की खरीद की जाएगी। यहां मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रहमण्यम की अध्यक्षता में हुई स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड (एसडीआरएफ) की स्टेट एग्जीक्यूटिव कमेटी (एसईसी) की बैठक में इसका फैसला लिया गया।
मुख्य सचिव ने बताया कि सेब की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। इसमें 18000 हेक्टर और 36000 हेक्टर राहत राशि तय की गई है। उन्होंने कहा कि बेमौसम बर्फबारी और बारिश ने बागवनी की फसलों को नुकसान करने के साथ भविष्य की 2-3 साल की फसल को भी प्रभावित किया है।
सेब की फसल के नुकसान के मुआवजे के लिए राशि निर्धारित की गई है। उन्होंने जिला प्रशासनों को निर्देश दिए कि ऐसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए पूर्व में मजबूत इंतजाम को सुनिश्चित बनाया जाए।
इन्हें कश्मीर घाटी के दस जिलों और जम्मू संभाग के डोडा, भद्रवाह, किश्तवाड़, रामबन, बनिहाल और लेह व कारगिल में भेजा जाएगा। 5.50 करोड़ रुपये से 22 बुलडोजर खरीदे जाएंगे।
बेमौसम बारिश, बर्फबारी से भारी नुकसान
रियासत में नवंबर के शुरू में हुई भारी बारिश और बर्फबारी से जानमाल का नुकसान हुआ था। इसमें बिजली गिरने से कटड़ा के कुन दरोयियां गांव के पचास वर्षीय निवासी फारूक अहमद बकरवाल की मौत हो गई थी।
जबकि उसकी बेटी और एक रिश्तेदार बुरी तरह से झुलस गए थे। कठुआ जिले की बिलावर तहसील में एक महिला बिजली गिरने से झुलस गई थी।
भारी बर्फबारी से जम्मू-श्रीनगर और श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ मुगल रोड के बंद हो जाने से हजारों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। कश्मीर और जम्मू संभाग में कृषि और बागवानी की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था।
श्रीनगर एयरपोर्ट पर दर्जनों उड़ाने रद् की गई थीं। वर्ष 2009 के बाद यह पहला मौका था जब श्रीनगर शहर में दस साल बाद नवंबर में बर्फबारी हुई है। इससे पहले 2008 व 2004 में ही नवंबर में शहर में बर्फबारी हुई थी।