पाबंदियों के बीच श्रमिकों को डोर टू डोर बस सेवा, ज्यादा दिहाड़ी देकर चलाया जा रहा काम। बाड़ी ब्राह्मणा में हैं 400 के करीब इकाइयां, ज्यादातर पर कोरोना महामारी का व्यापक असर।
कोरोना महामारी की पाबंदियों का असर औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ने लगा है। हालांकि पहली लहर के मुकाबले कोरोना की दूसरी लहर में उद्योग-धंधे ज्यादा तैयारी के साथ हालात का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद हार्डवेयर जैसी कम महत्व की वस्तुओं से जुड़े उद्योगों पर ताले लग गए हैं। प्रदेश के बड़े औद्योगिक क्षेत्र बाड़ी ब्राह्मणा में 400 इकाइयों में से दस फीसदी उद्योग बंद हो गए हैं।
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महामारी की रोकथाम के लिए लगाई गई पाबंदियों के बीच श्रमिकों को घर वापसी से रोकने के लिए डोर टू डोर बस सेवा दी जा रही है। सरकार की ओर से निर्धारित दर से ज्यादा दिहाड़ी समेत कुछ अन्य प्रावधान कर औद्योगिक इकाई प्रबंधन जैसे तैसे श्रमिकाें से काम ले रहे हैं।
सामान्य तौर पर कुशल प्रवासी श्रमिकों पर ज्यादा निर्भरता रहती थी, लेकिन श्रमिकाें की कमी के बीच स्थानीय श्रमिकों से काम लिया जा रहा है। उद्योगपतियों का कहना है कि कोरोना की पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में कारखाना प्रबंधक, श्रमिक और प्रशासन समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं। इसी के चलते पाबंदियाें में भी उद्योग-धंधों काम जारी रखना संभव हो पा रहा है।
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प्रशासन और सरकार से औद्योगिक क्षेत्र को सहयोग मिल रहा है। इस बार श्रमिकों की ज्यादा कमी नहीं आने दी जा रही है। कम मांग वाले उत्पादाें के यूनिट बंद हो गए हैं। बाड़ी ब्राह्मणा में ऐसे 10 फीसदी यूनिट हैं। सरकार को विशेष प्रावधान कर उद्योगों की मदद करनी चाहिए। वर्तमान में कारखानाें में 25 फीसदी पूंजी प्रबंधन लगाता है और 75 फीसदी बैंक ऋण देता है। बैंक ऋण को बढ़ाकर 85 फीसदी किया जाना चाहिए। अभी तक के हालात जैसे तैसे चल रहे हैं। पाबंदियां बढ़ने पर नुकसान बढ़ना लाजमी है। - ललित महाजन, प्रधान, बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
प्रबंधन ने हमें अपने स्तर पर व्यवस्थाएं चलाने के अधिकार दे दिए हैं। फिलहाल श्रमिकों की कमी नहीं है। जहां परेशानी आती है, एसोसिएशन ने बातचीत कर सहयोग लिया जा रहा है। कई सारी व्यवस्थाएं मौजूदा हालात को देखकर की जा रही हैं। - सुशील रोहिल्ला, यूनिट मैनेजमेंट अधिकारी, पैक पेप्सी
कोरोना काल में जिन प्रबंधनों ने श्रमिकों के हित संरक्षित किए, उन्हें श्रमिकाें की समस्या नहीं है। पाबंदियों के बीच कारखाना प्रबंधन श्रमिकाें के लिए जरूरी व्यवस्थाएं कर रहा है। खानपान की सुविधा के अलावा सरकार द्वारा तय दिहाड़ी 225 की तुलना में 280 रुपये दिहाड़ी कर दी गई है। उत्पादन जारी है लेकिन इसमें कमी जरूर आई है। - सर्वेंद्र पांडे, मैनेजर, डोम्स फैक्ट्री
बाड़ी ब्राह्मणा औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्रियों को श्रमिकों की सुविधा मुहैया कराना ज्यादा मुश्किल हो गया है। कोरोना की पहली लहर से पहले जितने श्रमिक उपलब्ध थे, कोरोना काल में वह स्थिति नहीं आ सकी है। कई प्रवासी श्रमिक घर लौटने के बाद वापस नहीं आए। ताजा हालात में स्थानीय श्रमिकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। श्रमिकों की सहूलियत के लिए डोर टू डोर बस सेवा लगा दी गई है, जिससे श्रमिक लॉकडाउन में घर से बाहर काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं। - चिंकल थापा, ठेकेदार
हमारे यहां पेट परीफॉर्म अनब्लाउन बोतलें बनाई जाती हैं। लॉकडाउन होने के कारण मांग बंद हो गई है। क्योंकि हमारा ज्यादातर माल गुड़गांव नोएडा जैसे शहरों में जाता है, लेकिन वहां से मांग बंद है। उनके पास लागत कम होने के कारण पहले से ही माल काफी मात्रा में पड़ा है, जिसके चलते हमें यूनिट को बंद करना पड़ा है। हमारे पास अपने श्रमिक हैं, जिनका वेतन उन्हें समय पर बंद होने के बाद भी मुहैया कराया जाता है। - विनोद जमवाल, प्रबंध निदेशक, वर्सेटाइल पॉलिटेक फैक्ट्री