बरसात में मलबा फंसने से बढ़ जाता है खतरा, पीडब्ल्यूडी के जेई बोले- पुल को तोड़ना ही स्थायी समाधान
2009 में बना पुल कुछ महीनों बाद बाढ़ में हुआ था क्षतिग्रस्त, लोगों ने उठाई तोड़कर दोबारा निर्माण की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। ऐतिहासिक तीर्थ स्थल उत्तरबहनी में देविका नदी पर वर्ष 2009 में निर्मित पुल अब लोगों की सुविधा के बजाय उनके लिए खतरे का कारण बन गया है। निर्माण के कुछ ही महीनों बाद आई बाढ़ में पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन आज तक न तो इसके क्षतिग्रस्त हिस्से का पुनर्निर्माण किया गया और न ही इसके नुकसान के कारणों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस लापरवाही के चलते करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति बेकार हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2011 में आई भीषण बाढ़ के दौरान पुल के क्षतिग्रस्त पिलरों में बड़े-बड़े पेड़, लकड़ियां और अन्य मलबा फंस गया था। इससे देविका नदी का बहाव प्रभावित हुआ और पानी किनारों की ओर मुड़ गया, जिससे उत्तरबहनी के ऐतिहासिक मंदिरों तथा आसपास के क्षेत्रों में नुकसान पहुंचा था। लोगों का कहना है कि यदि भविष्य में फिर से भारी वर्षा और बाढ़ की स्थिति बनती है तो यह पुल बड़ी तबाही का कारण बन सकता है।
स्थानीय लोगों ने उठाई समस्या
स्थानीय निवासी सुभाष चंद्र ने बताया कि प्रत्येक वर्ष बरसात के बाद लोक निर्माण विभाग की ओर से सड़क के आसपास सफाई और मलबा हटाने के लिए टेंडर जारी किया जाता है। इसके बावजूद पिछले वर्ष की बाढ़ में फंसे पेड़ और मलबे को आज तक पूरी तरह नहीं हटाया गया है। बरसात के दौरान यही मलबा पानी की रुकावट बनकर बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। उपराज्यपाल प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की गई है कि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को तत्काल तोड़कर आधुनिक तरीके से दोबारा बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। उनका कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
मंदिरों को सुरक्षित कराए प्रशासन
स्थानीय निवासी और दुकानदारों रमन कुमार, राकेश कुमार, राधु शर्मा और सुभाष शर्मा सहित अन्य लोगों ने कहा कि हर वर्ष बरसात के मौसम में क्षेत्र के लोग भय के साये में रहते हैं। प्रशासन को समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए ताकि लोगों की जानमाल और उत्तरबहनी के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल पुल के आसपास फंसा मलबा हटाने तथा पुल के पुनर्निर्माण या तोड़े जाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
कोट-
तकनीकी दृष्टि से अब इस क्षतिग्रस्त पुल को तोड़ना ही उचित समाधान है। पुल को हटाने और आगे की कार्रवाई विभागीय प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। यदि देविका नदी में अधिक बाढ़ आती है तो वर्तमान स्थिति में यह पुल लोगों और आसपास स्थित मंदिरों के लिए खतरा बन सकता है। -गुलशन कुमार, जूनियर इंजीनियर, लोक निर्माण विभाग