पिछले वित्तीय वर्ष में पहलगाम में हमला, ऑपरेशन सिंदूर और शताब्दी की सबसे बड़ी बाढ़ के बावजूद जम्मू-कश्मीर के बैंकों ने खूब कारोबार किया। कई चुनौतियां के बीच बाजारों की सुस्ती और धीमी हुईं आर्थिक गतिविधियों के बावजूद बैंकिंग क्षेत्र में रफ्तार बनी रही।
यूटी लेवल बैंकर्स कमेटी (यूटीएलबीसी) के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही तक प्रदेश का बैंकिंग कारोबार 8 प्रतिशत बढ़कर 3,10,745 करोड़ से 3,35,769 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसमें जमा राशि आठ प्रतिशत बढ़कर 2,06,507 करोड़ और ऋण नाै प्रतिशत बढ़कर 1,29,262 करोड़ रुपये रहा। ये बैंकों पर भरोसा दिखाता है। सबसे सकारात्मक सुधार एनपीए में दिखा जो 2024-25 के 5,025 करोड़ रुपये के मुकाबले 15 प्रतिशत घटकर 4,277 करोड़ रुपये रह गया। ये आंकड़े बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते जन-विश्वास और बेहतर ऋण वसूली प्रबंधन को दर्शाते हैं।
किसानों और एमएसएमई को मिली लोन में तवज्जो
किसान, छोटे कारोबारी और एमएसएमई को दिया गया कर्ज 46,930 करोड़ से बढ़कर 56,702 करोड़ रुपये हो गया। इसमें 21 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और कुल कर्ज में इनकी हिस्सेदारी 44 फीसदी तक पहुंच गई। यानी हर 100 रुपये के कर्ज में अब 44 रुपये छोटे सेक्टर को जा रहे हैं। इससे छोटे कारोबार फिर से संभलते नजर आ रहे हैं। हालांकि बड़े सेक्टर में कर्ज में सिर्फ एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई। क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो 62.01 फीसदी से बढ़कर 62.59 फीसदी हुआ है। यानी अभी बैंकों में जमा 100 रुपये पर करीब 62 रुपये ही कर्ज दिया जा रहा है।
आंतकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर और बाढ़ जैसे बड़े झटकों के बावजूद जम्मू-कश्मीर का बैंकिंग क्षेत्र न सिर्फ टिके रहने में कामयाब रहा बल्कि आगे बढ़ता भी दिखा। यह अच्छे संकेत हैं। यह इशारा है कि प्रदेश में आने वाले वर्षों में आर्थिक गतिविधियां और तेजी पकड़ सकती हैं।
- प्रो. अश्विनी नंदा, अर्थशास्त्री, केंद्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू