कोरोना के कारण लगातार दूसरे वर्ष ऑफलाइन शैक्षणिक गतिविधियां ठप हैं। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है। इस बार ऑनलाइन शिक्षा की लौ गांवों तक पहुंची है, लेकिन उसकी गुणवत्ता काफी कम है। ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप में सिर्फ पाठ्यक्रम की फोटो भेजकर खानापूरी जा रही है।
इसको समझना बच्चों के लिए आसान नहीं। इसलिए, इन बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई फिलहाल के लिए आसान नहीं। कोरोना की दूसरी लहर के कारण स्कूल बंद होने पर 15 दिनों बाद ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो पाई थी। इसमें बच्चों को सिर्फ पाठ्यक्रम की फोटो ही मिल रही है। शहर में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन पढ़ाई की सामग्री मिल रही है।
वहीं, अगर सरकारी स्कूलों के बच्चों की बात की जाए तो वह सिर्फ तस्वीरों से काम चला रहे हैं। इन बच्चों के सामने सबसे बड़ी परेशानी तो ये है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर छात्रों के पास लैपटॉप और स्मार्टफोन की व्यवस्था नहीं है। अगर है भी तो उसका रिचार्ज करना उनके लिए संभव नहीं होता।
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सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले शुभम कुमार ने कहा कि स्कूल ने व्हाट्सएप ग्रुप तो बनाया है, लेकिन उसमें किताब से किसी पाठ का फोटो खींचकर भेजा जाता है। इसे समझना काफी मुश्किल होता है। पांच विषयों में से सिर्फ एक विषय की क्लास लाइव होती है, जिसमें अध्यापक हमें अच्छी तरह समझाते हैं। वहीं, 10वीं कक्षा के छात्र कर्ण ने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई समझ के परे है।