उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ समय में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। सभी क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। अगले चार साल में 34500 मेगावाट हाइड्रो पावर का उत्पादन होने लगेगा। लेकिन सच्चाई यह भी है कि विद्युत क्षेत्र में कई खामियां मिली हैं। इसके लिए छोटे और लंबी स्तर की योजना पर विचार किया जा रहा है, जिसके लिए जल्द प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
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कृषि और हॉर्टिकल्चर क्षेत्र पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। इस बार 170 हेक्टेयर में उच्च घनत्व के सेब की पैदावार हुई है, जिसमें इस साल 200 हेक्टेयर सेब लगाने का योजना है। इसमें कश्मीर के अलावा जम्मू संभाग के भी विभिन्न जिलों में सेब लगाया जाएगा। केसर को जियो टैगिंग मिल गई है और बाकी प्रमुख फलों को भी जियो टैगिंग देने का प्रयास किया जा रहा है।
लावेपोरा मुठभेड़ मामले में उपराज्यपाल ने कहा कि मैं जिम्मेदारी से कहता हूं कि अगर कहीं संदेह होगा तो जरूर जांच करवाई जाएगी। जम्मू-कश्मीर एक संवेदनशील केंद्र शासित प्रदेश है और हमें सुरक्षाबलों के मनोबल का भी ध्यान रखना होगा। दोनों पक्षों को ध्यान में रखते हुए काम किया जाएगा। इस मामले में सारे तथ्य आए हैं और उचित विचार किया जा रहा है।
मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर सरकार गंभीर है। नौकरियां और आवास पुनर्वास का मुख्य माध्यम होगा। केंद्र ने छह हजार घर और छह नौकरियों की घोषणा की थी। नौकरियों के लिए 167 पदों को छोड़कर बाकी के लिए विज्ञापन कर दिया गया है और उम्मीद है कि मई तक यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
इसके अलावा अब तक सिर्फ 600 घर ही बने थे, लेकिन अब 3500 के लिए टेंडर कर दिए गए हैं और बाकी के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। यह प्रक्रिया अगले 18-19 माह में पूरी करने की उम्मीद है। टेंडर वाले घर दो साल में बन जाएंगे। कश्मीरी पंडितों के संगठन से निरंतर चर्चा की जाती रही है।