28 मार्च को आशिक ने भी हमले को अंजाम देने वाली जगह की रेकी की और 28 की शाम को शाकिर और उसके दोस्त फिरोज ने डांगरपोरा से मुदस्सिर और विदेशी आतंकी को बटपोरा लाया जहां वे फिरोज अहमद के घर पर रुके। एसएसपी ने बताया कि अगले दिन 29 मार्च को मुदस्सिर ने जुनैद और इमरान को म्युनिसिपल कार्यालय के नजदीक रहने को कहा और शाकिर ने मुदस्सिर और दूसरे आतंकी को अपनी बाइक पर अंदरूनी रास्तों से म्युनिसिपल कार्यालय तक पहुंचाया।
ओजीडब्ल्यू शाकिर की बाइक का हमले में किया इस्तेमाल
हमले को अंजाम देने से पहले मुदस्सिर ने जुनैद और इमरान को कांप्लेक्स में जाकर पुलिस और पार्षदों की मौजूदगी की जानकारी लाने को कहा। दोपहर करीब पौने एक बजे वो अंदर दाखिल हुए और हमले को अंजाम दिया। इसमें पार्षद रियाज अहमद व शमशुद्दीन मारे गए, जबकि एसपीओ शफात अहमद शहीद हो गए। पुलिस के अनुसार हमले को अंजाम देने के बाद वह फिर से शाकिर की बाइक पर सवार होकर फरार हो गए। उसके बाद सोपोर पुलिस ने अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर धरपकड़ शुरू की।