170 किमी लंबे मार्ग पर टनल बन जाने से दूरी लगभग 26 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। वहीं पूरे मार्ग पर घुमावदार पर्वतीय रास्तों को सीधा करने के साथ-साथ कई छोटी टनल तथा पुलों का निर्माण होने से 30 किलोमीटर और रास्ता कम होने की बात डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिर्पोट में (डीपीआर) में सामने आई है। इससे यह राष्ट्रीय राजमार्ग मात्र 110 किमी रह जाएगा।
कठुआ के पर्वतीय इलाकों का होगा कायाकल्प
कठुआ जिले के पर्वतीय क्षेत्र बसोहली, बनी, सरथल प्राकृतिक सौंदर्य से लबालब होने के बावजूद खस्ता सड़क मार्ग के चलते घोर अनदेखी के शिकार हो रहे हैं। इस राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण से न केवल पूरे इलाके का विकास होगा बल्कि निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय निवासियों को इसका लाभ मिलेगा।
घाटी के लिए वैकल्पिक मार्ग होगा यह हाईवे
एनएच बसोहली से शुरू होकर वर्तमान में बटोत-डोडा-किश्तवाड़-सिंथन अनंतनाग से होते हुए गुजर रहे नेशनल हाईवे 244 से जुड़ेगा। लखनपुर से बसोहली तक का सफर भी सुगम होगा जिस पर पहले से ही काम चल रहा है। चिनाब रीजन से जोड़ने के साथ ही यह घाटी के लिए वैकल्पिक मार्ग भी होगा।
यह परियोजना संसदीय क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है। पठानकोट से लेकर बसोहली-बनी-भद्रवाह और पुल डोडा तक का यह हाईवे प्रदेश में विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। चूंकि परियोजना में भारी भरकम राशि के खर्च होने का अनुमान है ऐसे में संबंधित मंत्रालय के विभागों से विचार विमर्श कर हाईवे प्राधिकरण और बीआरओ को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपने पर निर्णय हुआ है। हाईवे और छत्रगलां टनल अपने साथ विकास और रोजगार के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र तक पहुंच की असीम संभावनाएं लेकर आएंगी। दिल्ली नोयडा डायरेक्ट फ्लाईवे की तर्ज पर ही यह एक्सप्रेस वे कॉरिडोर को विकसित किए जाने की योजना है। -डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्यमंत्री