उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी की इस विचारधारा पर कायम रहेंगे कि चाहे कोई किसी भी धर्म को मानता हो उनके लिए सभी एक समान हैं। मेरे पिता ने कभी भी दो राष्ट्र के सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया। वह कभी नहीं मानते थे कि मुस्लिम, हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध और अन्य धर्म अलग हैं। उन्होंने खुद भी हमेशा एकता के लिए काम किया है और आखिरी दम तक यही करते रहेंगे।
पनुन कश्मीर के विधेयक का करेंगे अध्ययन
वेबिनार में फारूक से पूछा गया कि क्या वह कश्मीरी पंडितों के संगठन पनुन कश्मीर की ओर से पिछले साल दिसंबर में लाए गए उस जनसंहार विधयेक का समर्थन करेंगे, जिसमें अलग होमलैंड की मांग की गई है? इस पर उन्होंने कहा कि वह पहले विधेयक को पढ़ेंगे। विधेयक में नरसंहार की जांच के लिए अलग बोर्ड तथा आयोग के गठन की भी मांग की गई है।
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