वर्ष 1983 से मुकदमा शुरू हुआ और 28 जुलाई 2014 को अदालत ने किरायेदारों को दुकानें खाली करने के आदेश दे दिए, लेकिन प्रतिवादी ने कोर्ट में अपील कर दी, जिससे आदेश पर अमल रोक दिया गया। आदेश के खिलाफ दूसरी अपील पर कोर्ट ने कहा कि लगभग आधी सदी तक किरायेदार दुकानों पर जमे रहे। अब उन्हें दो सप्ताह में कब्जा छोड़ना होगा।
जम्मू-कश्मीर में अदालत में चल रहे एक मामले में हाईकोर्ट ने मुकदमे के चार दशक बाद किरायेदारों से दुकानें खाली कराने का रास्ता साफ कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किरायेदारों ने कानूनी प्रक्रिया का फायदा उठाकर लगभग चालीस वर्ष तक मालिक को उसकी दुकानों पर कब्जा नहीं लेने दिया। इस देरी से मामले पर धूल-मिट्टी की परत जम गई है। इससे पहले कि मामला पूरी तरह से धूल-मिट्टी में ही दफन हो जाए, इस पर उचित फैसला जरूरी है।
इस मामले में काजी अब्दुल रशीद ने श्रीनगर के जवाहर नगर स्थित टिन की छत वाली दो दुकानाें को वर्ष 1982 में किराये पर दिया था। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अली मोहम्मद मागरे ने कहा कि यह बेहद पीड़ादायक है कि दुकानों के मालिक चार दशक पूर्व अदालत के पास फरियाद लेकर आए थे। वे आज भी वहीं खड़े हैं।