फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जम्मू-कश्मीर : 24 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन में भी नहीं मिला किश्तवाड़ में लापता 19 लोगों का सुराग

Fri, 30 Jul 2021 12:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, किश्तवाड़

सार

  • दच्छन क्षेत्र के होंजड़ में एयरलिफ्ट कर पहुंचाईं एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें, पूरा दिन चली मलबे में जिंदगी की तलाश
  • लापता लोगों की तलाश में चिनाब  किनारे भी चलाया गया सर्च ऑपरेशन, बादल फटने के बाद आई बाढ़ में फसलें हो गई हैं तबाह
विज्ञापन
रेस्क्यू ऑपरेशन - फोटो : ????????
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बादल फटने के बाद किश्तवाड़ में दच्छन क्षेत्र के होंजड़ में पांच किलोमीटर तक मलबे के ढेर लग गए हैं। करीब एक हजार कनाल जमीन तबाह हो गई है। इस क्षेत्र में फसलों का नामोनिशान नहीं है। इसी बीच, बादल फटने की घटना के दूसरे दिन वीरवार को भी बचाव अभियान जारी रहा। एयरलिफ्ट कर पहुंचाई गईं एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी दिन भर मलबे में जिंदगियों की तलाश करती रहीं। 24 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी लापता 19 लोगों का कोई पता नहीं चल सका है। उधर, पुल और रास्ते बहने के कारण मचैल माता क्षेत्र में अभी भी सौ से ज्यादा यात्री फंसे हैं। बीते दिन रेस्क्यू किए गए 17 में से पांच लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। 

विज्ञापन


दच्छन क्षेत्र के होंजड़ गांव में मंगलवार रात को बादल फटने से सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 19 लोग लापता हैं। 21 घर, गौशालाएं, पुल, राशन डिपो ध्वस्त होने के साथ मस्जिद भी क्षतिग्रस्त हो गई है। वीरवार को पूरा दिन रेस्क्यू ऑपरेशन चलता रहा। पुलिस, सेना और एसडीआरएफ के साथ दोपहर को हेलिकॉप्टर से पहुंची एनडीआरएफ की टीम ने भी कड़ी मशक्कत की, लेकिन लापता 19 लोगों में से किसी का कोई सुराग नहीं मिल सका। लापता लोगों की नाले के जरिये चिनाब नदी में भी पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जिनकी तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। 

उधर, सरकार के कई बड़े अधिकारी होंजड़ में पहुंच कर राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। घटना के बाद देर रात एडीजीपी मुकेश सिंह और मंडलायुक्त डॉ. राघव लंगर ने मौके पर पहुंचकर मौके का जायजा लिया। एसडीआरएफ तथा एनडीआरएफ की टीमों को घटनास्थल पर भेजने के लिए सुबह से ही तैयार रखा गया था, लेकिन मौसम खराब होने की वजह से दोपहर बाद उन्हें वायुसेना के हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर मौके पर पहुंचाया गया। एक टीम सुबह 5.45 बजे सड़क मार्ग से घटनास्थल पर भेजी गई। बुधवार को भी टीम को एयरलिफ्ट कर मौके पर भेजने की कोशिश की गई, लेकिन खराब मौसम के चलते यह संभव नहीं हो सका। शुक्रवार को रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहेगा।
विज्ञापन


सड़क न होने के कारण गांव में नहीं पहुंच पा रही मशीनरी
बादल फटने के बाद गांव के 19 मकान मलबे में तब्दील हो गए हैं। सड़क न होने के कारण खोदाई के लिए मशीनरी नहीं पहुंच पा रही है। सभी टीमें हाथ से पेड़, पत्थर और लकड़ियां उठाने को मजबूर हैं। लापता लोग मलबे नीचे दबे हो सकते हैं, लेकिन मलबे बिना मशीनरी हटाना संभव नहीं है। गांव तक पहुंचने के लिए सड़क से करीब सात किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ता है। पूरा रास्ता पहाड़ी से होकर ही गुजरता है।

सौंदर तक ही पहुंच पा रहा वायुसेना का हेलिकॉप्टर
वायु सेना का हेलिकाप्टर भी सौंदर गांव तक ही जा पा रहा है। एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ टीमों को केवल सौंदर गांव तक ही पहुंचा पा रहा है। इससे आगे करीब सात किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। सड़क के रास्ते भी टीमें हिरवाई गांव तक ही जा पा रही हैं। इससे आगे सभी को पैदल सफल करना पड़ रहा है।

मौसम खराब होने से एनडीआरएफ की टीम नहीं लौट सकी
राहत कार्यों के लिए यहां पहुंची एनडीआरएफ टीम के कुछ सदस्य और डॉग स्कवायड वीरवार शाम मौसम खराब होने के कारण यहीं फंस गए। उन्हें हैलीपैड पर रुकना पड़ा है।

पल-पल की जानकारी ले रहे गृह मंत्री शाह
उधर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा गृह मंत्रालय लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहकर पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। उप राज्यपाल तथा मुख्य सचिव से पूरी स्थिति की जानकारी लेने के साथ ही हर संभव सहयोग करने का भरोसा दिया है।

एलजी बोले, पुनर्वास की हर संभव कोशिश होगी
उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि वे इस प्राकृतिक आपदा के शिकार हुए तथा प्रभावित लोगों के पुनर्वास की हर संभव कोशिश करेंगे। घटना काफी दुखद है जिसमें सात लोगों की जान चली गई। उन्होंने घायल लोगों के बेहतर इलाज की हिदायत दी।

क्याड़ गांव में आठ मकान क्षतिग्रस्त, पुल बहा
दच्छन तहसील के क्याड़ गांव में नाले पर बना पुल बह जाने के कारण गांव का संपर्क कट गया है। बादल फटने के कारण आई बाढ़ से यहां आठ मकानों को नुकसान पहुंचा है। लगभग 50 घरों वाले क्याड़ गांव में राहत कार्य भी तेजी से नहीं हो पा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें