जम्मू नगर निगम जम्मू की संपत्ति आवंटन नीति मामले में हाईकोर्ट ने शहरी विकास विभाग के आयुक्त सचिव पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि आयुक्त सचिव को यह राशि स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के खाते में जमा करवानी होगी।
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कोर्ट ने कहा कि आदेश के बावजूद अधिकारी ने आवंटन नीति का ड्राफ्ट अपने पास ही दबाए रखा। यह बेहद गंभीर मामला है। अधिकारी को पूर्व में जारी आदेश का पालन करने के लिए अंतिम मौका देकर दो हफ्तों का समय दिया जाता है। आयुक्त सचिव को बताना होगा कि उन्होंने इस दिशा में क्या कदम उठाए हैं।
जम्मू नगर निगम की ओर से शहर में अवैध रूप से दुकानें, फ्लैट, गैराज और अन्य संपत्ति देने का मामला कोर्ट में उठाया गया था। एडवोकेट इर्तिजा मुश्ताक की ओर से कोर्ट में इसे लेकर जनहित याचिका दायर की थी। सोमवार को चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की ओर से इस मामले पर सुनवाई की गई। खंडपीठ ने कहा कि आवंटन नीति के मसौदे पर ढुलमुल रवैये को और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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यह मामला मूल्यवान सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा है। इससे पहले एडवोकेट शकील अहमद ने अपीलकर्ता, सीनियर एडिशन एडवोकेट जनरल एसएस नंदा ने विभाग, एडवोकेट सचिन गुप्ता ने नगर निगम के पूर्व आयुक्त आर एस जमवाल और निगम के पूर्व पीए मदन मोहन की तरफ से दलीलें पेश कीं। खंडपीठ ने दलीलें सुनने के बाद नगर निगम की आयुक्त अवनी लवासा से भी कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें और जरूरी कार्य सुनिश्चित करें।
एडवोकेट शकील अहमद ने कोर्ट को बताया कि याचिका दायर होने के बाद 10 मार्च 2020 को कोर्ट ने आदेश दिया था कि आयुक्त सचिव आवास एवं शहरी विकास विभाग कोर्ट में रिपोर्ट पेश करेंगे। जिसमें यह बताया जाना था कि नगर निगम की कितनी संपत्ति है, किस किस के पास यह संपत्ति है और इसे अलाट करने के लिए क्या नियम बने हैं। लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी इस आदेश का पालन नहीं हुआ। जेएनएफ