ठंड के साथ दरियाओं में जल स्तर कम होने की वजह से रियासत में पन बिजली उत्पादन गिरने का दौर जारी है। रियासत में राज्य और केंद्रीय सेक्टर के तहत लगी पन बिजली परियोजनाओं में क्षमता से बीस से पच्चीस फीसदी की गिरावट आ चुकी है। तापमान के और गिरने के साथ इसमें गिरावट का दौर अभी जारी रहेगा। ऐसे में बिजली की मांग और उपलब्धता के चलते अघोषित कटौती का सिलसिला शुरू हो चुका है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में मौजूदा समय में केंद्रीय सेक्टर के अंतर्गत एनएचपीसी की 1889 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाली सात पन बिजली परियोजनाएं चल रही है।
इनमें 690 मेगावाट पन बिजली उत्पादन की क्षमता वाली सलाल परियोजना, 480 मेगावाट की क्षमता वाली उड़ी एक, 390 मेगावाट बिजली की क्षमता की डुलहस्ती, 120 मेगावाट की सेवा दो, 45 मेगावाट की निमा बाजगो, 44 मेगावाट की चुटुक और 240 मेगावाट पन बिजली उत्पादन की क्षमता वाली उड़ी दो पन बिजली परियोजना शामिल है। केंद्रीय परियोजनाओं से जम्मू कश्मीर को 12 फीसदी मुफ्त बिजली मिलती है।
वहीं स्टेट सेक्टर में 21 परियोजनाओं में से 761.96 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इनमें 450 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाली बगलिहार एक प्रमुख तौर पर शामिल है।
सर्दियों में दरियाओं में जल स्तर कम होने और पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते के तहत चिनाब और झेलम दरिया में चल रही परियोजनाओं में सीमित आधार तक ही पन बिजली परियोजनाओं के लिए पानी के इस्तेमाल के चलते परियोजनाओं में अब तक करीब 20 से 25 फीसदी उत्पादन गिर चुका है।
केंद्रीय परियोजनाओं से करीब पचास फीसदी बिजली देश के विभिन्न राज्यों में जिसमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी सर्प्लाई की जाती है।