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जम्मू-कश्मीर में लग सकता है राष्ट्रपति शासन!

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पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है कि औपचारिक बातचीत का दौर फिलहाल शुरू तो नहीं हुआ है लेकिन पार्टी को उम्मीद है कि औपचारिक बातचीत शुरू होगी। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष जुगल किशोर का कहना है कि भाजपा रियासत में स्थायी सरकार के लिए सारे विकल्प खुले रखे हुए है।
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औपचारिक बातचीत का दौर भी जल्द ही शुरू होगा। उधर, कठुआ में भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. निर्मल सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया कि 19 जनवरी से पहले सरकार बना ली जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी किसी भी दल के साथ गठबंधन का फैसला नहीं हुआ है।

भाजपा का मुख्य मुद्दा राज्य में बेहतर और विकास करवाने वाली सरकार देना है। अन्य किसी मुद्दे को बाद में भी लाया या निकाला जा सकता है। पीडीपी की ओर झुकाव पर कहा कि ऐसा नहीं है कि केवल पीडीपी ही विकल्प है। हर दरवाजा खुला है और बात हो सकती है।
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राज्यपाल ने केंद्रीय गृह सचिव से की मुलाकात

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के करीब एक पखवाड़े बाद भी वहां कोई दल सरकार बनाता नहीं दिख रहा है। ऐसे में राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना प्रबल होती जा रही है। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 18 जनवरी को पूरा हो रहा है।

लेकिन अभी तक राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों (पीडीपी और भाजपा) में से किसी ने सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या बल का इंतजाम नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक एक निजी दौरे पर दिल्ली आए राज्यपाल एनएन वोहरा ने राज्य की ताजा राजनीतिक स्थिति के बारे में केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी के साथ चर्चा की है।

साथ ही बुधवार सुबह में ही लंदन से लौटे कार्यवाहक मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी राज्यपाल से मुलाकात की है। हालांकि, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भुवनेश्वर में आशा जताई कि गतिरोध जल्द दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी बातचीत कर रही है।

अभी तक जम्मू-कश्मीर को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है, लेकिन बातचीत जारी है और जल्द की सरकार बनाने के बारे में स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी।

रियासत में नयी सरकार दिल्ली चुनाव के बाद

जम्मू में नई सरकार को लेकर माथापच्ची अब भी चल रही है। बातचीत की प्रक्रिया में तेजी आई है। इस बीच राज्यपाल एनएन वोहरा ने केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी से दिल्ली में मिलकर राज्य में सरकार गठन को लेकर चल रहे प्रयासों की जानकारी दी।

अस्वस्थ पिता को देखकर बुधवार विदेश से दिल्ली लौटे कार्यकारी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी राज्यपाल से मिले। समझा जाता है कि दोनों के बीच नई सरकार के गठन को लेकर बने गतिरोध पर ही बातचीत हुई।  

इससे यह कयासबाजी शुरू हो गई है कि रियासत राज्यपाल शासन की ओर बढ़ रही है। कहा जा रहा है कि दिल्ली चुनाव के बाद भाजपा पीडीपी या अन्य किसी से गठबंधन पर बातचीत कर सकती है ताकि दिल्ली चुनाव में किरकरी होने से बचे।
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गठबंधन पर फैसला दिल्ली चुनाव के बाद हो सकता

सूत्रों का कहना है कि  पीडीपी की अफस्पा हटाने, 370 को बहाल रखने तथा पाकिस्तान से शांति प्रक्रिया के लिए बातचीत शुरू करने जैसी शर्तों के मुद्दे को भाजपा दिल्ली चुनाव के पहले छूना नहीं चाहेगी। दिल्ली में कांग्रेस तथा आप इन मुद्दों पर समझौते को लेकर भाजपा पर जोरदार हमले बोल सकतीं हैं।

इससे बचने के लिए गठबंधन पर फैसला दिल्ली चुनाव के बाद हो सकता है। खंडित जनादेश के बीच पीडीपी और भाजपा की ओर से सरकार बनाने की दिशा में पहल शुरू की गई। लेकिन, एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय करने के लिए अब तक बातचीत शुरू नहीं हो पाई है।  

माना यह जा रहा है की पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद के दस जनवरी को जम्मू आने पर सियासी धुंध छंटनी शुरू हो सकती है। यहां उनकी भाजपा नेताओं से सरकार बनाने की दिशा में बातचीत शुरू हो सकती है। इस बीच, कार्यकारी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी दोपहर बाद विदेश से दिल्ली पहुंच गए।

वे दिल्ली में भाजपा के कुछ बड़े नेताओं से मिल सकते हैं। विदेश जाने से पहले भी उनकी भाजपा नेताओं से मुलाकात हुई थी, लेकिन बाद में पीडीपी से बढ़ती नजदीकियों को लेकर उन्होंने इस गठबंधन की स्वीकार्यता पर हमला बोलना शुरू कर दिया था। नई सरकार के गठन में अभी दस दिन से अधिक का समय है। इस वजह से कोई भी दल जल्दबाजी में फैसला नहीं करना चाहता है।
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