जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय ने सोमवार को प्रदेश के गृहसचिव से यहां अवैध रूप से रहने वाले म्यांमार और बांग्लादेश के नागरिकों की पहचान के लिए तंत्र विकसित करने और उनकी सूची बनाने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति मोक्षा खजूरिया काजमी की खंडपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील सेठी के साथ अधिवक्ता अंकेश चंदेल की जनहित याचिका की सुनवाई के बाद कहा कि इस व्यवस्था को छह सप्ताह के अंदर पूरा कर लिया जाए। एडवोकेट हुनर गुप्ता ने इन लोगों के जम्मू आने के मामले की जांच की मांग की थी। यह जांच एक रिटायर जज से कराने की मांग की गई।
एडवोकेट हुनर ने यह भी मांग रखी थी कि इन लोगों की पहचान की जाए और इन्हें प्रदेश से बाहर भेजा जाए। क्योंकि इन लोगों के लिए जम्मू-कश्मीर में किसी शरणार्थी शिविर की घोषणा नहीं की गई है। बता दें कि प्रदेश में 13400 के करीब म्यांमार और बांग्लादेशी रह रहे हैं। न्यायालय ने यह महसूस किया कि यह जनहित याचिका म्यांमार और बांग्लादेश के सभी अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए कुछ जांच की मांग करती है, जो वहां से चले गए हैं और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में बस गए हैं। इस मामले की और जांच होनी चाहिए।