जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक आदेश को रद्द कर कहा कि मंडलायुक्त (डिवकॉम) के पास मजिस्ट्रेट की शक्तियां नहीं हैं। वे सीआरपीसी की धारा 144 के तहत आदेश जारी नहीं कर सकते। न तो डिवकॉम और ना ही उनके कार्यालय के तहत आने वाले उप निदेशक अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी के पास मजिस्ट्रेट के अधिकार हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कश्मीर मंडलायुक्त और उप निदेशक (ईएंडएस) की ओर से जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक प्लास्टिक इकाई को प्रदूषण के चलते बंद करने के कहा गया था।
न्यायाधीश संजीव कुमार ने कहा कि कुलगाम जिले में कैमोह क्वाकी बाजार में स्थित इकाई को लेकर संबंधित अधिकृत मजिस्ट्रेट अथवा अधिकृत एजेंसी ही कार्रवाई कर सकती है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 144 की शक्तियां इस्तेमाल करने के लिए प्रदेश सरकार ने जिला मजिस्ट्रेट, सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट और कार्यकारी मजिस्ट्रेट को विशेष रूप से शक्तियां प्रदान की हैं।
इसमें डिवकॉम और उनके कार्यालय के साथ काम करने वाले उप निदेशक नहीं आते। कोर्ट ने कहा कि जन जीवन पर किसी भी तरह के खतरे व आपात स्थिति को देखते हुए अधिकृत मजिस्ट्रेट 144 लागू कर सकते हैं। इसका आदेश दो माह की अवधि तक प्रभावी रहता है, जिसके बाद सरकार इसे बढ़ाने के लिए अधिसूचना जारी कर सकती है।
इस मामले में याची अपनी मालिकाना भूमि पर प्लास्टिक का एकत्रीकरण, भंडारण और पृथकीकरण करता है। इससे प्रदूषण का मामला जल प्रदूषण रोकथाम अधिनियम 1974 व वायु प्रदूषण अधिनियम 1981 के दायरे में आता है, जिस पर डिवकॉम आदेश जारी नहीं कर सकते।