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JK हाईकोर्ट ने खारिज किया मसर्रत आलम पर लगा पीएसए

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कट्टरपंथी अलगाववादी नेता मसर्रत आलम के खिलाफ लगाए गए पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) को शुक्रवार को शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया। मसर्रत को कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी नारे लगाने और पाकिस्तानी झंडे फहराने के लिए इस वर्ष अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था।
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जस्टिस हसनैन मसूदी द्वारा पहले आलम के वकील की ओर से दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था लेकिन अब अलगाववादी नेता पर लगाए पीएसए को खारिज कर दिया।

मसर्रत के वकील शबीर अहमद भट ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि आज उच्च न्यायलय द्वारा जो फैसला आया है उसके लिए हमने पहले से याचिका दायर कर रखी थी। उन्होने बताया कि अब यह राज्य सरकार पर निर्भर करता है कि वह मसर्रत को रिहा करेंगे या फिर किसी और मामले में दुबारा से पीएसए लगाएंगे।
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रिहाई के लिए जल्द डालेंगे बेल याचिका: भट

भट ने बताया कि अब उनकी ओर से कुछ दस्तावेज़ बनाके मसर्रत को भेजे जाएंगे और जब वह उनपर हस्ताक्षर करेंगे तो उसके बाद उनकी बेल के लिए याचिका दायर की जाएगी।

गौरतलब है कि मसर्रत को १७ अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। उसपर हुर्रियत (ग) के अध्यक्ष सईद अली शाह गिलानी की स्वागत रैली के दौरान पाकिस्तानी झंडे फहराने के साथ साथ राष्ट्र विरोधी नारेबाजी लगाने का आरोप लगाया गया था।

पुलिस द्वारा मसर्रत, गिलानी समेत अन्य कईं अलगाववादियों के खिलाफ देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मामला दर्ज किया गया था जिनपर बड़गाम पुलिस स्टेशन में गैरकानूनी गतिविधि के 13 निवारण अधिनियम, 120-बी, 147, 341, 336, 427 आरपीसी के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई थी।

इससे पूर्व मसर्रत आलम को मार्च में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद ही रिहा किया गया। उसे वर्ष २०१० में घाटी में हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
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