श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने पशुधन के सुचारू परिवहन और पंजाब के अधिकारियों द्वारा पशुधन से लदे वाहनों पर अधिक शुल्क वसूलने के आरोपों का समाधान करने के लिए पंजाब सरकार के साथ बातचीत करने हेतु वरिष्ठ अधिकारियों की एक तीन-सदस्यीय टीम का गठन किया है। सरकारी आदेश के अनुसार, जिसकी एक प्रति अमर उजाला के पास है, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग ने संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए टीम के पंजाब दौरे को औपचारिक रूप से मंज़ूरी दे दी है। यह कदम पशुधन व्यापारियों द्वारा अंतरराज्यीय चौकियों पर कथित जबरन वसूली और अनावश्यक देरी, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर जाने वाले ट्रकों पर, की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के जवाब में उठाया गया है।
समिति में नामित अधिकारियों में - मनोज प्रभाकर, उप नियंत्रक, विधिक माप विज्ञान विभाग, जम्मू कश्मीर मोहम्मद रफीक भट, उप निदेशक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, कश्मीर और शाम लाल अबरोल, उप निदेशक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, जम्मू शामिल हैं।
सरकारी निर्देश के अनुसार टीम इस मुद्दे के सौहार्दपूर्ण समाधान और भविष्य में अधिक कीमत वसूलने की घटनाओं को रोकने के लिए पंजाब सरकार के संबंधित विभागों के साथ बातचीत करेगी। उन्हें अपने दौरे के बाद प्रशासनिक विभाग को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया गया है जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
हालांकि हितधारकों को यह कदम रास नहीं आया है। मटन डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव मेहराजुद्दीन गनई ने बताया कि यह आदेश'मज़ाक' लगता है क्योंकि इसमें टीम के दौरे की तारीख, रिपोर्ट जमा करने की समय सीमा या जबरन वसूली के मुद्दे को हल करने के लिए कोई ठोस निर्णय कब लिया जाएगा, जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्पष्टता का अभाव है।
उन्होंने मटन डीलर बिरादरी से परामर्श या जानकारी दिए बिना समिति बनाने के लिए सरकार की आलोचना की। गनई ने दुख जताते हुए कहा कि हम पहले से ही निजी तौर पर पंजाब में हैं और कई विधायकों और मंत्रियों से मिलकर उन्हें शंभू बॉर्डर और माधवपुर में हुई जबरन वसूली के बारे में बता चुके हैं। जो काम सरकार को करना चाहिए वह निजी लोग कर रहे हैं।