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जम्मू-कश्मीर: तवी नदी रूट से हमला करने आए थे ड्रोन, जानिए हमला कर किस तरह से वापस गए पाकिस्तान

Wed, 07 Jul 2021 03:33 PM IST
करिश्मा चिब अजय मीनिया, जम्मू

सार

मकवाल बॉर्डर से दाखिल होने के बाद तवी के बीचों बीच कम ऊंचाई से हुई ड्रोन की आवाजाही। एनआईए जांच में खुलासा, जम्मू पहुंचने पर बाबा पीर मजार रूट से एयरफोर्स स्टेशन में हुए दाखिल। पहले धमाके के 10 मिनट बाद दूसरे धमाके से थी एयरफोर्स के बड़े अफसरों को निशाना बनाने की साजिश। दूसरे धमाके में आरडीएक्स के बाहर सबसे खतरनाक लोहे की लेयर बनाकर विस्फोट किया गया।
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ड्रोन हमला - फोटो : iStock
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विस्तार
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जम्मू में वायुसेना स्टेशन पर आरडीएक्स गिराकर हमला करने वाले ड्रोन पाकिस्तान से तवी नदी के रूट पर उड़कर यहां पहुंचे थे। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मकवाल बॉर्डर से यह ड्रोन इस तरफ तवी नदी मार्ग के ऊपर से उड़कर जम्मू पहुंचे और फिर सतवारी के बाबा पीर की बाईं ओर से एयरफोर्स स्टेशन में घुसे। आरडीएक्स गिराकर धमाके करने के बाद यह ड्रोन इसी रूट से वापस पाकिस्तान चले गए। यह खुलासा हमले की जांच में हुआ है।

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जांच में अब तक जो बातें सामने आई हैं, उसके मुताबिक हमले का मुख्य उद्देश्य एयरफोर्स के बड़े अफसरों समेत ज्यादा से ज्यादा जवानों को निशाना बनाना था। इसीलिए पहला धमाका करने के सात मिनट बाद दूसरे ड्रोन से एक और ज्यादा नुकसान पहुंचाने में सक्षम हमला किया गया। मंशा थी कि पहले धमाके के बाद अफसर और कर्मी मौके पर मौजूद होंगे। जांच के अनुसार लश्कर ने पूरी साजिश पाकिस्तान में रची और जीपीएस वाले ड्रोन से इस हमले को अंजाम दिया गया।

दूसरे ड्रोन से गिराए गए आरडीएक्स के बाहर बनाई गई खतरनाक लोहे की लेयर
दूसरे हमले के लिए आरडीएक्स के बाहर एक खतरनाक लोहे की लेयर बनाई गई थी, ताकि विस्फोट होने के बाद इससे निकलने वाले छर्रे वहां मौजूद लोगों को छलनी कर दें। यह छर्रे मानव शरीर के आरपार हो जाते हैं।
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तवी का ही इस्तेमाल क्यों
तवी नदी की चौड़ाई 100 से 200 मीटर तक है। यह जम्मू से मकवाल बॉर्डर की तरफ से पाकिस्तान जाती है। तवी के ऊपर कम ऊंचाई से ड्रोन इस तरफ भेजे गए। जांच में पता चला है कि ड्रोन तवी नदी के बीचों बीच से कम ऊंचाई पर उड़ाए गए ताकि किसी की नजर न पड़े। ड्रोन का जम्मू पहुंचने और लौटने का तरीका एक जैसा ही रहा।

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यह वजह थी हमले में सात मिनट का अंतराल
आतंकियों की साजिश पहले हमले के दस मिनट बाद दूसरा हमला करने की थी। लेकिन आतंकियों की यह साजिश विफल हो गई। क्योंकि पहले हमले के बाद जब सात मिनट तक भी घटनास्थल पर ज्यादा लोग जमा नहीं हुए तो इसे सात मिनट के बाद ही कर दिया गया, जबकि हमला 10 मिनट बाद होना था।
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कार्बन फाइबर और एल्युमीनियम वाले चाइनीज ड्रोन का इस्तेमाल
हमले में चाइनीज ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। कार्बन फाइबर और एल्युमीनियम से बने इन ड्रोन में तीन बैटरियां थीं। इनके नीचे आरडीएक्स लगाया गया था। आरडीएक्स के नीचे एक नोक बनाई गई थी, जिसके ऊपर डेटोनेटर था। जैसे ही यह आरडीएक्स वाली आईईडी नीचे गिरी और इसकी नोक जमीन से टकराई तो डेटोनेटर से कनेक्ट होकर धमाका हो गया।

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