जीएमसी में मेडिकल एजूकेशन यूनिट (एमईयू) के बैनर तले चिकित्सा कर्मियों के लिए म्यूकोर्मिकोसिस (ब्लैक फंगस) पर कांटिन्यूज मेडिकल एजूकेशन (सीएमई) का आयोजन किया गया। जीएमसी की प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन ने कहा कि जब मानव शरीर में ब्लैक फंगस होता है तो यह नाक, आंखों के चेहरे, मस्तिष्क आदि पर फैलता है।
डॉक्टर के परामर्श के बिना स्टेरॉयड का इस्तेमाल न करें, ऐसा करने से ब्लैक फंगस हो सकता है। स्टेरॉयड का इस्तेमाल ब्लैक फंगस का मुख्य कारण देखा गया है। रोगियों के लिए एक म्यूकोर्मिकोसिस प्रयोगशाला स्थापित की गई है और केओएच (पोटेशियम हाइड्राक्साइड) परीक्षण द्वारा निदान 2-6 घंटे (टर्न अराउंड टाइम) में किया जा सकता है।
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ईएनटी विभाग के एचओडी डॉ. प्रमोद कलसोत्रा ने सर्जिकल प्रबंधन पर प्रस्तुति दी। डॉ. गुरमीत सिंह ने ब्लैक फंगस के औषधीय प्रबंधन के बारे में बात की। अन्य वक्ताओं में मेहरीन डॉ. विजय कुंडल आदि रहे। सीएमई में फैकल्टी और नर्सिंग स्टाफ व वर्चुअल मोड पर कई सदस्यों ने भाग लिया।