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जम्मू-कश्मीरः गोजरी और पहाड़ी को राजभाषा के रूप में शामिल करने की उठी मांग

Sun, 06 Sep 2020 05:01 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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पूर्व विधायक और जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी (जेकेएपी) के नेता मुमताज अहमद खान ने रविवार को केंद्र सरकार से अपील की, कि गोजरी और पहाड़ी भाषा को केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषाओं के रूप में शामिल किया जाए। यह मांग तब उठी है जब विभिन्न सिख संगठनों ने पंजाबी भाषा को राजभाषा के रूप में शामिल न किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की है।

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बता दें कि 2 सितंबर को, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक विधेयक को मंजूरी दी थी। जिसके तहत कश्मीरी, डोगरी, हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाएं होंगी। सूची में गोजरी और पहाड़ी को शामिल न किए जाने पर खान ने कहा कि पहाड़ियों और गुर्जरों की अलग-अलग सांस्कृतिक पहचान हैं और इस फैसले से इन भाषाओं को बोलने वाले लोगों में आक्रोश है।

उन्होंने कहा कि कश्मीरी, डोगरी और उर्दू जम्मू-कश्मीर में लोकप्रिय भाषाएं हैं। गोजरी और पहाड़ी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। केंद्र शासित प्रदेश के अधिकांश लोगों द्वारा बोली जाती हैं। सरकार को केंद्र शासित प्रदेश के लोगों में अंतर नहीं करना चाहिए। इन दोनों भाषाओं को आधिकारिक भाषाओं के रूप में शामिल करने की मांग को स्वीकार करना चाहिए।
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कहा कि पीर पंजाल (पुंछ और राजौरी जिलों), जम्मू संभाग के अन्य जिलों और कश्मीर संभाग के कुछ हिस्सों में सरकार के इस निर्णय से नाराजगी है। यहां खानाबदोश रहते हैं। खानाबदोशों की जम्मू-कश्मीर में तीसरी सबसे बड़ी आबादी है।

 

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