केंद्रीय पुस्तकालय के अध्यक्ष रोमेश शर्मा ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के बीच भी विश्वविद्यालय बंद रहा। पीजी छात्रों और शोधार्थियों को ई-जोर्नल, ई-बुक्स सुविधा दी गई है। पुस्तकालय में सभी पुस्तकें ऑनलाइन पढ़ाने के लिए सॉफ्टवेयर नहीं है। सभी विभागों और पुस्तकालय को मिलकर सामग्री को ऑनलाइन करने की नई पहल शुरू करनी होगी।
केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के पास सभी पुस्तकें ऑनलाइन पढ़ाने का सॉफ्टवेयर उपलब्ध नहीं है। पुस्तकालय में शोधार्थियों और पीजी छात्रों को सिर्फ ई-जोर्नल, ई-बुक्स और एंटी-प्लेजरिज्म की सुविधाएं ही ऑनलाइन मुहैया हो रही है।
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केंद्रीय पुस्तकालय में 24 हजार से अधिक पुस्तकें और ग्रंथ उपलब्ध हैं। इनमें गीता, पुराण, विष्णु पुराण, गरुड़ पुराण, वेद और रामचरित मानस भी हैं, लेकिन कोविड आपदा में छात्रों को इन सभी पुस्तकों और ग्रंथों का लाभ नहीं मिल पाया। वाट्सएप, ई-मेल और गूगल या ऑफलाइन पुस्तकों से पढ़ाई करनी पढ़ी। एक टॉपिक के लिए छात्रों को कई पुस्तकें खोजनी पड़ती हैं।
एबीवीपी अध्यक्ष एवं पर्यावरण विभाग के शोधार्थी शुभम रैना ने बताया कि पुस्तकालय में जितने ऑनलाइन संसाधन उपलब्ध हैं। सभी का छात्र और शोधार्थी पूरा लाभ ले रहे हैं, लेकिन डिजिटल की कमी है। विवि को सभी पुस्तकों के कंटेंट ऑनलाइन करने चाहिए। छात्रों और शोधार्थियों को पहचान पत्र भी जारी हों। खड़गपुर आईआईटी की तरह केंद्रीय विवि जम्मू के पुस्तकालय में भी डिजिटल साधन बनाए जाएं। जिससे आपदा की घड़ी में छात्रों को पढ़ने में आसानी हो।
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लोकनीति और लोक प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अनुसंधानकर्ता शशांक कुलकर्णी ने बताया कि पुस्तकालय में उपलब्ध ई-रिसोर्स को प्रयोग करने के बारे में छात्रों को प्रशिक्षण देना चाहिए, ताकि वे इसका प्रयोग सही ढंग से कर सकें। विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. डॉ. रसाल सिंह ने बताया कि बीता डेढ़ साल अध्ययन-अध्यापन के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। केंद्रीय विश्वविद्यालय ने इस चुनौती से निपटने के लिए डिजिटल पुस्तकालय, ऑनलाइन प्रयोगशाला और अन्य ऑनलाइन माध्यमों का प्रयोग किया। हालांकि अभी डिजिटल सोर्सेज की व्यापकता और सर्व-सुलभता की दिशा में और अधिक काम करने की आवश्यकता है।