सरकारी जमीन को वापस लेने के आदेश पर रोक लगाने संबंधी याचिका को सीजेएम जम्मू अमरजीत सिंह ने खारिज कर दिया। अब्दुल मजीद समेत अन्य ने खसरा नंबर 911, 924, 928, 929, 931, 999, 1002, 1008, 1021, 1082 और 1083 के तहत 152 कनाल 16 मरला पर अपने कब्जे को हटाने संबंधी आदेश को रद्द करने की याचिका दी थी।
यह जमीन कोट भलवाल तहसील जम्मू में है। यह जमीन रोशनी एक्ट के तहत उक्त लोगों ने ली थी। इस जमीन पर इनका कब्जा था। जबकि रोशनी एक्ट को सरकार ने रद्द कर दिया था। जज ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि यदि सरकार कुछ समय के लिए किसी को जमीन दे देती है तो इसका यह मतलब नहीं कि लेने वाले का उस पर स्थायी हक है।
विडंबना यह है कि जब राज्य की भूमि होती है, तो यह समझ में नहीं आता है कि आवेदक अब्दुल मजीद का नाम उपरोक्त राजस्व निकालने के स्वामित्व कॉलम में कैसे दर्शाया गया है। यह भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि यदि कोई व्यक्ति कुछ समय के लिए प्रशासनिक उदासीनता के कारण सरकारी भूमि पर कब्जा कर लेता है, तो उक्त कब्जे को स्थायी नहीं माना जा सकता।
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सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले डरावने चेहरों को सामने लाने करने की जरूरत है। यह चेहरे सरकारी तंत्र की मदद से ऐसा करते हैं। इस मामले में यह भी सामने आया है कि कब्जा करने वालों के पास जमीन का नामांकन कैसा हो गया है। यह जमीन रोशनी एक्ट के तहत ली गई थी और इसको असंवैधानिक करार दिया जा चुका है। लिहाजा संबंधित प्रशासन यह जमीन वापस ले।