सीमा पार लांचिंग पैड पर 140 आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के लिए तैयार बैठे हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम समझौते के बावजूद नियंत्रण रेखा पर आतंकी ढांचे बरकरार हैं। दोनों देश इस वर्ष फरवरी में संघर्ष विराम के लिए सहमत हुए थे। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने वीरवार को बताया कि संघर्ष विराम समझौता पाकिस्तान के लिए अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि वह वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की ग्रे सूची से बाहर आने की लगातार सख्त कोशिश कर रहा है।
इस्लामाबाद की कोशिश ईमानदार हो सकती है कि उसने आतंकी ढांचे को नष्ट कर दिया परंतु नियंत्रण रेखा के पार लांच पैड पर लगभग 140 आतंकवादियों की मौजूदगी को सेना देख रही है, जो संभवत: जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन मजबूत घुसपैठ रोधी ग्रिड के कारण वह कदम आगे बढ़ाने की हिम्ममत नहीं जुटा पा रहे हैं। अधिकारी ने कहा, सीमापार से पहले भी कोशिश की गई लेकिन सतर्क जवानों ने उनके सभी नापाक मंसूबों को नाकाम कर दिया।
इसके बाद उन्हें कदम वापस खीचंने पड़े। अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान संघर्ष विराम के समय का उपयोग एलओसी पर अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कर रहा है, जो पिछले साल गोलाबारी में क्षतिग्रस्त हो गया था। यह गोलाबारी भारतीय क्षेत्र में अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई के रूप में की गई थी। दो साल पहले केंद्र द्वारा विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद से जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए, अधिकारी ने कहा कि विदेशी आतंकवादी अचानक घटनास्थल से गायब हो गए हैं और खुद को या तो घनी आबादी वाले क्षेत्रों में या प्राकृतिक गुफाओं वाले पहाड़ी क्षेत्रों में बने ठिकाने में छिपा लिया है।
स्थानीय लोगों के आतंकवादी संगठनों में शामिल होने पर अधिकारी ने कहा कि सभी को निरंतर एक संदेश दिया गया है कि देश के खिलाफ कोई भी बुरी मंशा रखने वालों जो या तो हथियार उठाते हैं या संप्रभुता के खिलाफ बुरे इरादे रखते हैं उन्हें ऐसे रास्तों से दूर रहना चाहिए। अन्यथा ऐसी ताकतों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।
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परिजनों की सतर्कता के कई लोगों की जान बची
सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि सेना लगातार उन परिवारों से संपर्क कर रही है जिनके बच्चों को बहला फुसला कर भटकाव के रास्ते पर ले जाए जाने की संभावना है। इसके परिणाम सामने आए हैं क्योंकि परिवारों को शिक्षित करने और अपने बच्चों को आतंकी गुटों में शामिल होने से रोकने के सक्रिय उदाहरण सामने आए हैं। इससे कई लोगों की जान अब तक बचाई गई है।