उसने एक बार भी नहीं बताया, वरना मैं उसे जाने ही नहीं देती श्वेता की मां बोली
उसने जरा भी जिक्र किया होता तो मैं जाने नहीं देतीश्वेता की मां नीना देवी का कहना है कि अभी 20 जुलाई को ही वह वापस गई थी। इसके पहले पूरा एक महीना घर पर थी। हमारे एक रिश्तेदार की शादी थी डोडा में। श्वेता को भी शादी में जाना था। परीक्षाओं के चलते वह वापस चली गई। अभी तीन दिन पहले ही उसने हमसे वीडियो काल पर बात की थी। वे लोग डोडा में थे। उसकी बातों से कहीं भी नहीं लगा कि वह ये कदम उठा लेगी। हमसे कभी इस तरह का कोई जिक्र भी नहीं किया।
करियर की चिंता और सिस्टम की बेरुखी ने ले ली एक होनहार बेटी की जान
तीन पेज का सुसाइट नोट….करिअर की चिंता, पैसे लेकर छात्रों को पास करने के आरोपों से भराश्वेता का सुसाइड नोट तीन पन्नो का है। लिखा है कि दो साल से टार्चर कर रहे हैं। हमारा बैचमेट इंटर्न बन चुका है। उनको भी दो तीन महीने हो गए।
हमारा अभी फाइनल ईयर का फस्ट इंटरनल हो रहा है। वो भी फोर्सफुली जूनियर के साथ। झूठ बोला कि दो माह के भीतर एग्जाम ले लेंगे, लेकिन दो साल से ज्यादा हो गए। भगवान जाने डिग्री कब मिलेगी। फाइनल ईयर कब खत्म होगा।
बहुत टार्चर किया इन्होंने। शायद अब मैं एक्सप्लेन करने की हिम्मत में नहीं हूं। हमारा करियर खराब कर दिया है। न जाने कितने पैसे लेकर उन छात्रों को पास कर दिया, जो कभी कालेज भी नहीं आए। अपने मन से बच्चा फेल कर दो।
आड बेंच बना दो। पैसे दे बच्चा तो ठीक, वरना उनका खून पीता रहें। इनका और ड्रामा झेलने की मेरी कैपेसिटी नहीं है। अगर इंडिया में जस्टिस मिलता है तो प्लीज भगवत को परमानेंट जेल में डाल दो। उनको भी सेम टार्चर फील हो, जो बच्चों को फील हो रहा है। वरना कोई बात नहीं। मुझे पता है इंडिया में कितना जस्टिस मिल सकता है। मैं यहां सिरदर्दी से फ्री होना चाहती थी, तो हो गई। बाकी भगवान देख लेंगे।