खेतों में बिखरा गोलाबारी का मलबा, जाने से डर रहे किसान
अब जून माह के पहले हफ्ते से बिजाई की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। संघर्ष विराम के बाद किसान बेचैन हैं। अब उन्हें धान की पनीरी तैयार करने की चिंता सताने लगी है। वहींए मढ़ और आरएस पुरा आदि इलाकों में गेहूं की कटाई भी शेष है। मौजूदा समय में सीमा पर तनावपूर्ण माहौल है। किसानों के लिए मवेशी चारा लाना भी चुनौती बन चुका है। खेतों में गोलाबारी का मलबा बिखरा है।
उधर, प्रशासन की ओर से भी किसानों को खेतों में जाने की अनुमति नहीं दी गई है। सीमावर्ती इलाकों के खेतों से विस्फोटक सामग्री हटाई जा रही है। कार्रवाई पूरी होने के बाद ही पनीरी सहित अन्य कृषि कार्य शुरू हो पाएंगे। ऐेसे में जून के पहले हफ्ते से धान की पनीरी का काम शुरू होने की संभावना है।
सांबा जिले के सीमावर्ती तहसील रामगढ़ के विजय चौधरी ने बताया कि गेहूं की कटाई मई में हो चुकी है। अब धान की पनीरी लगाने का समय है। माहौल सामान्य होने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा।
खेतों में जाने से डर रहे सीमावर्ती किसान
अखनूर निवासी विजय सैनी ने बताया कि बीते सप्ताह सीमाओं में तनातनी रही है। इससे सीमावर्ती किसान खेती करने से डर रहे हैं। अभी तक हालत सामान्य नहीं हैं। रात के समय सीमावर्ती लोग बाहर आने से डर रहे हैं। धान की पनीरी पर काम अभी शुरू नहीं हुआ है। हालांकि, बीते साल धान की पनीरी 10 मई के बाद शुरू कर दी गई थी।
ये हैं चुनौतियां
- श्रमिकों की कमी
- कंबाइन मशीनें पंजाब लौट चुकी हैं
- संदिग्ध वस्तुओं से विस्फोट होने का डर
कोट
सीमा पर उपजे तनाव से किसान दहशत में हैं। कुछ क्षेत्रों में फसल की कटाई शेष है तो कुछ जगह में धान की पनीरी का काम होना है। अब हालात सामान्य होने के बाद जून तक ही धान की पनीरी की बीजाई हो सकेगी।
- कुलभूषण खजूरिया, सदस्य, किसान एडवाइजरी बोर्ड
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मढ़, आरएस पुरा सहित कई सीमांत इलाकों में फसल की कटाई होनी है। गोलाबारी के कारण श्रमिक लौट गए हैं। धान की पनीरी का काम करने में देरी होगी। कृषि विभाग निशुल्क बीज मुहैया करवाए। साथ ही खेतों की सफाई जल्द करवाए।
-तेजिंद्र सिंह बजीर, अध्यक्ष, जम्मू कश्मीर किसान काउंसिल
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कृषि विभाग की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बीज स्टाेरों में भेज दिया है। किसान हालात सामान्य होने के बाद काम शुरू कर सकते हैं।
- एएस रीन, निदेशक, कृषि विभाग