धार्मिक अनुष्ठान करती कश्मीरी पंडित समुदय की महिलाएं। फाइल चित्र
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सरकार की नीतियों के विरोध और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 108 कश्मीरी पंडित शनिवार को भूख हड़ताल करेंगे। न्याय संकल्प दिवस अभियान के तहत विस्थापित कश्मीरी पंडित जम्मू प्रेस क्लब के बाहर एक दिवसीय अनशन पर बैठेंगे। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य सरकार का ध्यान समुदाय से जुड़े लंबित राजनीतिक और पुनर्वास संबंधी मुद्दों की ओर आकर्षित करना है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को आधिकारिक मान्यता देना और घाटी में कश्मीरी पंडितों के लिए अलग सुरक्षित पनुन कश्मीर की स्थापना शामिल है। सुबह दस से शाम चार बजे तक विस्थापित समुदाय के सम्मानजनक और सुरक्षित पुनर्वास सहित अन्य मांगें भी उठाई जाएंगी।
पनुन कश्मीर के संयोजक डॉ. अग्निशेखर, अध्यक्ष टीटू गंजू और एमके धर का कहना है कि तीन दशक से अधिक समय से विस्थापन का दंश झेल रहे कश्मीरी पंडितों की समस्याओं का समाधान केवल राहत और पुनर्वास योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समुदाय अपने विस्थापन के मूल कारणों पर न्याय और स्थायी राजनीतिक समाधान की मांग कर रहा है। एक दिवसीय भूख हड़ताल के माध्यम से सरकार पर इन मुद्दों पर ठोस पहल करने का दबाव बनाया जाएगा। आंदोलनकारियों ने कहा है कि उनका संघर्ष लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।
पनुन कश्मीर की प्रमुख मांगें
- केंद्र सरकार कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को आधिकारिक रूप से मान्यता दे और इससे संबंधित पनुन कश्मीर जेनोसाइड बिल-2020 को लागू करे।
- कश्मीर घाटी के भीतर कश्मीरी हिंदुओं के लिए अलग होमलैंड ‘पनुन कश्मीर’ का गठन किया जाए।
- विस्थापित कश्मीरी पंडित परिवारों को मिलने वाली मासिक राहत राशि को बढ़ाकर प्रति राहतधारी परिवार 25 हजार रुपये किया जाए।
- 15 हजार बेरोजगार कश्मीरी पंडित युवाओं को उपयुक्त केंद्रीय सरकारी विभागों में रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
- विस्थापित समुदाय की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए कश्मीर में उनकी राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का दीर्घकालिक समाधान हो।