संसद पर हमला कर चुके अफजल गुरु की मौत के बाद भी उसका नाम जिंदा रखने की कोशिश की जा रही है। अफजल के नाम पर कश्मीर के युवाओं को फिदायीन बनाया जा रहा है। जिसकी जिम्मेदारी अफजल के करीबी रहे कुछ आतंकियों को दी गई है। ऐसे करीब आधा दर्जन आतंकी है, जो अफजल के नाम पर नए फिदायीन तैयार कर रहे हैं।
कुछ दिन पहले मारा गया जैश कमांडर नूर तांत्रे भी अफजल का करीबी था। नूर तांत्रे ने ही पुलवामा के 16 साल के आतंकी को फिदायीन बनाया। खुफिया एजेंसी जैश ए मोहम्मद आतंकी संगठन की इस साजिश को नाकाम बनाने का तोड़ ढूंढ रही हैं। जानकारी के अनुसार जैश ए मोहम्मद की ओर से किए गए पिछले सभी बड़े हमले अफजल गुरु बिग्रेड ने किए हैं। बेशक इसमें पाकिस्तानी आतंकी थे। लेकिन पाकिस्तान के अलावा अब कश्मीर के आतंकियों को भी इस बिग्रेड का हिस्सा बनाया जा रहा है।
जैश ए मोहम्मद अफजल गुरु का नाम लेकर कश्मीरी आतंकियों को उकसा रहा है। कश्मीर में जैश ए मोहम्मद के लिए काम करने वाले आतंकियों की संख्या 30 से 40 के बीच है। इनमें एक आधा दर्जन ऐसे हैं, जो अफजल के साथ किसी न किसी तरह से जुड़े हुए हैं। यह आतंकी 40 से 45 साल की आयु के हैं। यहीं नहीं, अफजल के करीबी रहने वाले कुछ आतंकी पीओके में भी हैं, जो वहां से अफजल गुरू के नाम पर आतंकी तैयार कर रहे हैं।
बड़े हमले अफजल बिग्रेड के
नगरोटा के सैन्य कैंप, उड़ी के सैन्य कैंप, पुलवामा सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर, पठानकोट एयरबेस और सोपोर में आईईडी हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद के अफजल बिग्रेड का हाथ है। पुलवामा में हमले करने वाले 16 वर्षीय आतंकी के जारी वीडियो में भी वह यह कहता नजर आया कि वह अफजल बिग्रेड का हिस्सा है। पठानकोट, उड़ी कई हमले इस बिग्रेड ने किए और भविष्य में भी अफजल बिग्रेड के नाम पर हमले होते रहेंगे। सूत्रों का कहना है कि घाटी के कुछ स्थानीय आतंकी अफजल गुरू बिग्रेड में शामिल हो चुके हैं, जो आने वाले दिनों में फिदायीन हमला कर सकते हैं।