आतंक प्रभावित कश्मीर घाटी में सबसे युवा आईजी के तौर पर तैनात स्वयं प्रकाश वानी ने पांच मार्च को हुए मात्र 20 मिनट कीमुठभेड़ में मुफ्ती वकास को मार गिराने वाले ऑपरेशन के बारे में जानकारी देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि नूर मोहम्मद तांत्रे, तलहा रशीद और अब मुफ्ती वकास के मारे जाने से जैश काफी हद तक प्रभावित हुआ है।
वकास की अगली रणनीति देश के अन्य हिस्सों में आतंकी वारदातों को अंजाम देने की थी। उसके फोन को जांच के लिए भेजा गया है। जांच में पता चला है कि वो लगातार कुछ लोगों के संपर्क में था जो जैश के आतंकी के तौर पर माने जा रहे हैं।
पांच मार्च को मिली सफलता के पीछे घाटी के संवेदनशील इलाके त्राल जो अब जैश के गढ़ के रूप में सामने आ रहा है, वहां लगातार चल रहे तलाशी अभियान से मिली। इसी तलाशी अभियान से बचने के लिए वकास त्राल से निकल गया। कुछ दिनों तक इधर उधर रहने के बाद वकास ने हट्टीपोरा को अपने ठिकाने के तौर पर चुना।
क्योंकि यहां से मध्य कश्मीर के बड़गाम में पहुंचना आसान था। वकास को घेरने से पहले पुलिस ने सेना और सीआरपीएफ की मदद से घेरे को और सख्त बना दिया।इस ऑपरेशन में शामिल एक आधिकारी ने बताया कि यह आपरेशन मेक ऑर ब्रेक का था।
अगर हम उसे जिंदा पकड़ते तो उससे कई खुफिया जानकारी हासिल करने का एक अच्छा मौका हाथ लग सकता था, लेकिन अगर वो मारा जाता तो जैश बुरी तरह टूट जाता।