जम्मू कश्मीर में सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण बहाल करने की मांग को लेकर राज्य विधानसभा में मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के 14 विधायक स्पीकर के सामने आ गए और फिर सदन से वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस के विधायक नवांग रिगजिन जोरा की अगुवाई में कांग्रेस के चार सदस्यों ने यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने मांग की कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए कि पदोन्नति में आरक्षण नीति बाहल हो।
नेशनल कान्फ्रेंस के दो विधायकों के अलावा कांग्रेस के विधायकों को भाजपा और पीडीपी के सदस्यों का भी साथ मिला जिनके निर्वाचन क्षेत्र में महत्वपूर्ण संख्या में आरक्षित श्रेणी के मतदाता है। विधानसभा अध्यक्ष कविंद्र गुप्ता ने उनकी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया जिससे वे आसन के सामने आ गए धरना दिया।
जोरा ने तो आसन के सामने समानांतर छद्म कार्यवाही चलाई और विरोध कर रहे सदस्यों को मुद्दे पर बोलने की अनुमति दी। लेह से विधायक ने कहा कि एक चाल के तहत पदोन्नति में आरक्षण को समाप्त किया जा रहा है क्योंकि सरकार के वकील (उच्च न्यायालय के समक्ष) कोई दलील नहीं रख पाए थे।
उन्होंने कहा कि राज्य की 50 प्रतिशत आबादी आरक्षित श्रेणी में आती है। इसपर आज एक घंटे की चर्चा होनी चाहिए। कानून मंत्री अब्दुल हक खान ने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित होने की वजह से विधानसभा में इस पर चर्चा नहीं की जा सकती है।
विधानसभा उपाध्यक्ष नजीर अहमद गुरेजी ने प्रदर्शनकारी विधायकों का समर्थन करते हुए कहा कि अगर इस मुद्दे पर मीडिया चर्चा कर सकता है तो विधानसभा क्यों नहीं। गुरेजी उस वक्त सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं कर रहे थे।