विपक्षी दलों और अलगाववादियों की आलोचना के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए टाउनशिप बसाने के मामले में बुधवार को यू-टर्न ले लिया । प्रदेश सरकार का कहना है कि कश्मीरी पंडितों को उनके मूल स्थान पर ही बसाया जाएगा। उन्हें घाटी में एक अलग-थलग समुदाय नहीं बनने दिया जाएगा।
मुफ्ती ने मंगलवार को कहा था कि कश्मीरी पंडित मुश्किल समय में राज्य के मुसलमानों के साथ भाइचारे से रहते आए हैं। उनको अपनी पैतृक जमीन पर लौटने का पूरा अधिकार है। मुफ्ती ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में कहा था कि वह घाटी में कश्मीरी पंडितों के लिए फ्लैट भी बनाएंगे, जिसका नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विरोध किया था।
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को किसी अलग जगह बसाने की जगह उन्हें उनके मूल स्थान पर ही बसाया जाएगा। कश्मीरी पंडित पारंपरिक कश्मीरी परंपराओं का अंग हैं। टाउनशिप के सवाल पर राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय के उन लोगों के लिए यह व्यवस्था की गई थी, जिनके पास कश्मीर में अपनी जमीन नहीं बची है।
कश्मीरी पंडितों के लिए अलग टाउनशिप बसाने की बात को उन्होंने शरारतपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इससे पहले विस्थापितों के लिए शेखपुरा और बड़गाम में अलग मकान बनाए गए थे, लेकिन उनका कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि घाटी में लौटने वाले कश्मीरी पंडित अपने मूल निवास स्थान पर ही रहना चाहते हैं।
जेकेएलएफ और विपक्ष को अलग टाउनशिप पर ऐतराज
कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के लिए अलग टाउनशिप सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष और अलगावादियों को इस पर गहरा ऐतराज है। जेकेएलएफ ने शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद लाल चौक में शांतिपूर्वक धरना के अलावा शनिवार को कश्मीर बंद का आह्वान किया है।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रियासत सरकार से अलग टाउनशिप के लिए जमीन चिह्नित करने को कहा है। मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद और राजनाथ की दिल्ली में हुई मुलाकात में कश्मीरी पंडितों के मसले पर लंबी बातचीत हुई थी। रियासत सरकार जमीन मुहैया कराने पर सहमत हो गई है। सियासी तूफान के बाद अब रियासत सरकार सफाई दे रही है।
केंद्र के प्रस्ताव के तहत श्रीनगर के ग्रामीण इलाकों और आसपास के क्षेत्रों के मिलाकर एक सेटेलाइट शहर बसाया जाना है। राजनाथ ने इसके लिए राज्यपाल एनएन वोहरा को भी पत्र लिखा था। अब सीएम मुफ्ती ने केंद्र को जमीन देने का भरोसा दिया है।
बकौल शिक्षा मंत्री नईम अख्तर यह टाउनशिप सिर्फ पंडितों के लिए आरक्षित नहीं होगी। कोई दूसरे समुदाय का व्यक्ति भी इसमें भूखंड खरीद सकता है।
नेकां के महासचिव अली मोहम्मद सागर ने कहा है कि पंडितों का विस्थापन ने कश्मीरी मुस्लिमों पर एक धब्बा लगाया है। हम उनकी वापसी चाहते हैं लेकिन उन्हें घाटी में अलग-थलग करने के प्रयास के विरोधी हैं। कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने कहा है कि अलग टाउनशिप तनाव बढ़ाएगा।
62 हजार कश्मीरी पंडित परिवारों की ससम्मान वापसी
आतंकवाद के दौर में घाटी से विस्थापित 62 हजार कश्मीरी पंडित परिवारों की ससम्मान वापसी भाजपा-पीडीपी के गठबंधन एजेंडे का अहम हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मिशन कश्मीर के इस मुद्दे को न्यूनतम साझा कार्यक्रम में अहम स्थान दिया गया है लेकिन पंडितों को बसाने से पहले ही उन्हें उजाड़ने की चेतावनियों का सिलसिला शुरू हो गया है।
जम्मू में 41 हजार कश्मीर पंडित परिवार रजिस्टर्ड हैं। अन्य राज्यों और दिल्ली में पंजीकृत पंडितों की संख्या 21 हजार है। दूसरे राज्यों में रह रहे कश्मीरी पंडितों को उन्हीं राज्यों से सहायता मिलती रही है। जम्मू कश्मीर का उसमें कोई योगदान नहीं है।
प्रधानमंत्री पुनर्वास कार्यक्रम के तहत 6 हजार कश्मीरी पंडित युवकों को रोजगार देने की योजना बनी थी। इसके अलावा 3000 पद सृजित किए गए। इस योजना के तहत 2184 युवकों का चयन किया गया है लेकिन उन्हें नौकरी अबतक नहीं मिली है।
इस पुनर्वास कार्यक्रम को कश्मीरी पंडितों ने महत्व नहीं दिया। नीति के तहत अबतक सिर्फ एक पंडित परिवार की घाटी में वापसी हुई है। केंद्र और रियासत का 1618 करोड़ का पैकेज अबतक अर्थहीन ही साबित हुआ है।
रियासत सरकार ने पुनर्वास नीति में सुधार के बाद नया प्रस्ताव केंद्र के पास भेजा है जिसके तहत केंद्र से 5800 करोड़ रुपये की मांग की गई है। केंद्र ने इस अहम प्रोजेक्ट के लिए आम बजट में इस साल 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।