जम्मू-कश्मीर में अन्य विभागों के कर्मचारियों को वन मंथ ऑन लीव की सुविधा है, लेकिन शिक्षकों को नहीं है। प्रदेश में विशेष कर लेक्चरर 18 से 20 साल तक एक ही ग्रेड पर काम करने को मजबूर हैं। हर साल वेतन में बढ़ोतरी तो होती है, लेकिन ग्रेड नहीं बढ़ता है। इससे कैरियर विकास में ठहराव आ रहा है। लद्दाख में लेक्चरर को समयबद्ध तरीके से अगला ग्रेड दिया जा रहा है। भर्ती नियमों में बदलाव की जरूरत है। 2010 में बने भर्ती नियमों में बदलाव नहीं हुआ है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
मंजीत सिंह चिब, प्रांतीय अध्यक्ष, ऑल जेएंडके प्लस टू पीएससी लेक्चरर एसोसिएशन
लेक्चरर की डीपीसी शुरू, होंगे नियमितजम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रभारी लेक्चररों को लेक्चरर के रूप में नियमित करने के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया शुरू की है। ये वह प्रभारी लेक्चरर हैं, जिनकी शैक्षणिक डिग्री को लेकर विसंगतियां थीं।
इसमें कुछ शिक्षकों ने शिक्षक बनने के बाद जरूरी डिग्रियां हासिल कीं, तो कुछ ने नियमित व डिस्टेंस मोड में डिग्री हासिल की थी। इसमें ऐसे लेक्चरर थे, जो प्रिंसिपल व हेडमास्टर बने थे, लेकिन जब उनकी डिग्रियों की जांच हुई, तो उसमें विसंगतियां मिली, जिसके बाद विभाग ने कुछ को पदावनति किया। हालांकि बाद में स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसे लेक्चरर को एक बार की छूट दी।
इसमें उनसे शपथपत्र लिया गया, जिसमें यह लिखा कि अगर भविष्य में उनकी डिग्रियों में विसंगतियां पाई जाएगी, तो विभाग उन्हें सेवा मुक्त कर सकता है। ऐसे लेक्चररों की अब डीपीसी प्रक्रिया शुरू हुई है, तो उन्हें प्रभारी लेक्चरर के रूप में नियमित किया जा सके।