प्रदेश भाजपा ने संगठनात्मक चुनाव के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। इसमें बूथ, मंडल और जिला अध्यक्ष बनने के लिए विभिन्न खेमों में कोशिशें जारी हैं। जिला स्तर पर जिला अध्यक्ष का चेहरा अहम रहता है। हालांकि इसमें जिला प्रभारी, सह प्रभारी और दूसरे पदाधिकारी रहते हैं, लेकिन पूरे जिले का प्रतिनिधित्व करने के लिए अध्यक्ष को अधिक अहमियत दी जाती है।
जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में जिला अध्यक्ष बनने के लिए कई दिग्गज नेता दौड़ में हैं। पार्टी की ओर से 10 जनवरी तक बूथ, मंडल और जिला अध्यक्ष स्तर के चुनाव संपन्न करने का लक्ष्य है। इसके बाद प्रदेशाध्यक्ष के लिए चुनाव होंगे। प्रदेश में भाजपा के करीब 12000 बूथ हैं। इन सभी में बूथ अध्यक्ष बनाए जाएंगे। कई स्थानों पर बूथ अध्यक्षों को नामित कर दिया गया है। अगर कोई बूथ बड़ा है तो उसे संगठनात्मक तौर पर दो बूथ बनाने का प्रावधान है। जैसे विस्थापित जिला में तीस बूथ और पांच मंडल बनाए गए हैं। बूथ चुनाव में हाथ खड़ा करके, सर्वसम्मति से या वोट डालने की प्रक्रिया से चुनाव करवाए जा रहे हैं।
इसमें प्राइमरी सदस्य शामिल होते हैं। अगर कम प्राइमरी सदस्य होंगे तो हाथ खड़ा करके किसी को नामित कर सकते हैं। इसके बाद मंडल अध्यक्ष के चुनाव के लिए बूथ अध्यक्ष और न्यूनतम दो सक्रिय सदस्य शामिल होते हैं। इसमें प्रत्येक सक्रिय सदस्य को न्यूनतम अपने साथ पचास सदस्यों को जोड़ना होता है। बाद में मंडल अध्यक्ष अपनी टीम बनाता है। जिला अध्यक्ष के चुनाव में मंडल अध्यक्ष, बूथ अध्यक्ष और सक्रिय सदस्य शामिल होते हैं।
मोटे तौर पर जिसके समर्थन में सक्रिय सदस्य अधिक होंगे, उसके पदाधिकारी बनने का दावा बढ़ जाता है। प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, राज्य पदाधिकारी, सक्रिय सदस्य शामिल होंगे। कार्यालय पदाधिकारी बनने के लिए सक्रिय सदस्य बनना जरूरी है, लेकिन प्रदेश में प्रदेशाध्यक्ष से नीचे जिला अध्यक्ष का पद महत्वपूर्ण होता है। प्रदेशाध्यक्ष को किसी भी महत्वपूर्ण फैसले के लिए जिला अध्यक्ष से राय लेनी पड़ती है।